हिंदू त्योहारों और मंदिरों पर प्रहार: हिंदू संस्कृति मिटाने की वैश्विक साजिश  

हिंदू पहचान को निशाना बनाना एक समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को मिटाने के लिए बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा एक वैश्विक अभियान है। यह अभियान बेहद सुनियोजित तरीके से हिंदू धर्म और संस्कृति को हानि पहुँचाने के उद्देश्य से सक्रिय है। मीडिया, हिंदू विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाकर और इन हमलों को जानबूझकर कमतर दिखाकर, इस तंत्र का हिस्सा बन जाता है। इससे हिंदू विरोधी घृणा (हिंदूद्वेष) को बढ़ावा मिलता है और यह अनियंत्रित रूप से फैलती जाती है।
  • दिवाली, दशहरा और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों के दौरान हिंदुओं पर बढ़ते हमले गहरे हिंदूद्वेष का परिणाम हैं।
  • पश्चिमी मीडिया इन हमलों को प्रेरित करने वाले हिंदूद्वेष को आमतौर पर कम महत्व देता है और इसके पीछे की व्यापक कहानी को उजागर नहीं करता।
  • हिंदू त्योहारों के समय हिंदुओं को डराना और धमकाना, हिंदू परंपराओं के खिलाफ़ वोक एजेंडे का एक प्रमुख हथियार बन गया है।
  • त्योहारों के दौरान वोक सद्गुण प्रदर्शन (virtue signalling) एक ऐसा माहौल बनाता है जो हिंदू त्योहारों और परंपराओं पर होने वाले हमलों को अप्रत्यक्ष रूप से वैधता प्रदान करता है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य हिंदुओं को उनके रीति-रिवाजों और परंपराओं को मनाने से हतोत्साहित करना है।

पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका, यूके और कनाडा जैसे पश्चिमी देशों में हिंदू मंदिरों पर हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। इन हमलों के पीछे अक्सर गहरी हिंदू विरोधी और भारत विरोधी भावनाएं होती हैं। ऐसे हमलों में एक खास पैटर्न दिखाई देता है, जिसमें मंदिर की दीवारों पर आपत्तिजनक और घृणित संदेश लिखकर हिंदू धर्म और भारत को निशाना बनाया जाता है। उदाहरण के लिए, सितंबर 2024 में कैलिफोर्निया के BAPS स्वामीनारायण मंदिर पर हमला किया गया। इसमें दीवारों पर “हिंदुओं वापस जाओ” जैसे नारे लिखे गए और तोड़फोड़ की गई। यह घटना न्यूयॉर्क के मेलविले में BAPS श्री स्वामीनारायण मंदिर पर हुई एक और ऐसी ही घटना के मात्र 10 दिन बाद हुई थी, जिसमें मंदिर की दीवारों पर हिंदू विरोधी संदेश लिखे गए थे।[1]

जनवरी 2024 में, लंदन के वेम्बली स्थित एक शिव मंदिर में एक नकाबपोश व्यक्ति ने कुरान की आयतें पढ़ते हुए मूर्तियों को नष्ट करने का प्रयास किया। हालांकि, भक्तों और स्वयंसेवकों ने तत्परता से हस्तक्षेप कर उसे रोक लिया, परंतु यह घटना हिंदू पूजा स्थलों पर बढ़ते खतरों की ओर संकेत करती है।[2]

हिंदू त्योहारों के दौरान हिंदू मंदिरों पर हमले और हिंदुओं के खिलाफ घृणा अपराधों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उदाहरण के लिए, दिवाली के समय कनाडा में खालिस्तानी समर्थकों ने एक मंदिर में तोड़फोड़ की[3], जिसके बाद हिंदू समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया। भारत में भी, जहां हिंदू बहुसंख्यक हैं, त्योहारों के दौरान ऐसी घटनाएं हुईं, जब अल्पसंख्यक समूहों के कुछ सदस्यों ने दिवाली मना रहे हिंदुओं को डराने और धमकाने का प्रयास किया। इसी तरह, बांग्लादेश में दुर्गा पूजा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान हिंदू मंदिरों पर हमले और मूर्तियों को तोड़ने की घटनाएं आम हो गई हैं।

यह प्रवृत्ति एक गंभीर समस्या की ओर इशारा करती है: हिंदुओं को उनके त्योहारों के दौरान हिंसा और उत्पीड़न के माध्यम से डराने की कोशिश की जा रही है। इसका उद्देश्य न केवल उनके त्योहारों को प्रभावित करना है बल्कि हिंदू परंपराओं और मान्यताओं को कमजोर करना भी है। इसके बावजूद, तथाकथित “वोक” तंत्र अक्सर इन घटनाओं पर चुप्पी साध लेता है। यह न केवल इन हमलों की निंदा करने में विफल रहता है, बल्कि कभी-कभी उस ज़हरीले विमर्श को भी बढ़ावा देता है, जो हिंदू विरोधी भावना को हवा देता है।

और भी चिंताजनक बात यह है कि मुख्यधारा की अंतरराष्ट्रीय मीडिया अक्सर सतही विवरणों पर ध्यान केंद्रित करती है और ऐसी घटनाओं को भारत से जुड़े राजनीतिक मुद्दों के रूप में प्रस्तुत करती है, खासकर मोदी सरकार से जुड़े “हिंदुत्व बहुसंख्यकवाद” के दावों को उजागर करते हुए। यह दृष्टिकोण हिंदूद्वेष के एजेंडे को कमतर आंकता है और वैश्विक स्तर पर हिंदुओं के खिलाफ बढ़ते घृणा अपराधों की व्यवस्थित प्रकृति को संबोधित करने से बचता है। इन हमलों को अलग-थलग घटनाओं के रूप में चित्रित करके और गहन विश्लेषण की उपेक्षा करते हुए, पश्चिमी मीडिया हिंदूफोबिया और इन हिंसक कृत्यों के बीच के व्यापक पैटर्न को स्वीकार करने में विफल रहती है। इस प्रक्रिया में, वह यह भी अनदेखा करती है कि कैसे ये घटनाएं वैश्विक स्तर पर हिंदुओं के खिलाफ लक्षित घृणा अपराधों के व्यापक आख्यान का हिस्सा बनती हैं, जो भारत और विदेशों दोनों में हिंदुओं के लिए खतरा पैदा करती हैं।

इस लेख का उद्देश्य त्योहारों के दौरान हिंदुओं और उनके पूजा स्थलों पर होने वाले हमलों की व्यवस्थित प्रकृति को सामने लाना है। साथ ही, यह समझना है कि वैश्विक “वोक” तंत्र कैसे इन घटनाओं को नज़रअंदाज़ करता है और ऐसा माहौल बनाता है, जो हिंदू विरोधी भावना को और अधिक बढ़ावा देता है।

हिंदुओं के ख़िलाफ़ होने वाले व्यवस्थित एवं समन्वित हमले

घटनाओं की यह श्रृंखला हिंदू त्योहारों के प्रति वैश्विक स्तर पर बढ़ती शत्रुता की एक गंभीर और चिंताजनक प्रवृत्ति को उजागर करती है। ये घटनाएं अलग-थलग मामले नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक और व्यवस्थित पैटर्न की ओर संकेत करती हैं। त्योहारों में व्यवधान डालने, बर्बरता करने, उत्पीड़न फैलाने और शारीरिक हिंसा तक, ये कृत्य हिंदू सांस्कृतिक और धार्मिक अभिव्यक्तियों के प्रति असहिष्णुता की एक समान मानसिकता को दर्शाते हैं।

  • नवी मुंबई के तलोजा सेक्टर 9 स्थित पंचानंद सोसाइटी में दिवाली के दौरान दो समुदायों के बीच तनावपूर्ण घटना सामने आई।[4] मुस्लिम समुदाय के कुछ सदस्यों ने सोसाइटी के सार्वजनिक क्षेत्रों में दिवाली की सजावटी लाइट्स लगाने पर आपत्ति जताई। इस विवाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कुछ पुरुष हिंदू महिलाओं को लाइट्स लगाने से रोकते और धमकाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में एक व्यक्ति महिलाओं के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें दिवाली की सजावट बंद करने की मांग कर रहा है, जबकि उसके समुदाय के अन्य सदस्य भी इस उत्पीड़न में शामिल हो गए।
  • फरीदाबाद, हरियाणा: दिवाली के दौरान फरीदाबाद में एक हिंदू परिवार को गंभीर हिंसा का सामना करना पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार, परिवार के छोटे बेटे ने घर के बाहर पटाखे फोड़े, जिसे लेकर पड़ोस के मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई। जब परिवार ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया, तो दो लोगों के नेतृत्व में भीड़ ने उन पर हमला कर दिया।[5] हमलावरों ने परिवार पर पत्थरों और ईंटों की बारिश कर दी, जिससे उन्हें घर के अंदर बंद होने को मजबूर होना पड़ा। आरोप है कि हमलावरों ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया और परिवार की बेटी से छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न का प्रयास किया। इस भयावह घटना ने दिवाली जैसे शांतिपूर्ण और सांस्कृतिक त्योहार पर गहरा असर डाला और समाज में बढ़ते धार्मिक तनाव की ओर इशारा किया।
  • जामिया मिलिया, दिल्ली:: अक्टूबर 2024 में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में दिवाली समारोह के दौरान एक और चिंताजनक घटना हुई। मुस्लिम छात्रों के एक समूह ने समारोह में व्यवधान उत्पन्न किया, “अल्लाहु अकबर” और “फिलिस्तीन जिंदाबाद” के नारे लगाते हुए दीयों और रंगोली को नष्ट कर दिया। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुए, जिनमें सजावट को लात मारते और छात्रों की धार्मिक भावनाओं को अपमानित करते हुए देखा गया।[6]
  • बहराइच: अक्टूबर 2024 में दशहरा समारोह के दौरान, उत्तर प्रदेश के बहराइच के महाराजगंज में विसर्जन जुलूस उस समय हिंसक हो गया, जब स्थानीय मुस्लिम कथित तौर पर डीजे संगीत बजाने को लेकर भड़क गए। इसके परिणामस्वरूप जमकर पथराव हुआ, जिसके नतीजन दुर्गा माँ की प्रतिमा क्षतिग्रस्त हो गई। इससे हिंदू समुदाय नाराज हो गया और दोनों पक्षों के बीच संघर्ष शुरू हो गया। इस अराजकता के बीच, 22 वर्षीय राम गोपाल मिश्रा ने कथित तौर पर एक मुस्लिम घर से हरा झंडा हटाकर उसकी जगह भगवा झंडा लगा दिया। दुखद रूप से, इस कृत्य के कारण मिश्रा की इस्लामी भीड़ द्वारा बेरहमी से हत्या कर दी गई।[7]
  • लाल चौक, श्रीनगर: दिवाली 2024 के दौरान, एक कश्मीरी बच्चे का वीडियो वायरल हुआ। लड़के ने दिवाली के अवसर पर श्रीनगर के लाल चौक पर चल रहे भव्य दिवाली समारोह के प्रति तिरस्कार व्यक्त किया, जिसमें सैकड़ों स्थानीय लोग और पर्यटक दीये जलाने के लिए इकट्ठा हुए थे। वीडियो में, इस कश्मीरी बच्चे ने, जो कि एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर है, हिंदू मूर्तियों के प्रदर्शन को लेकर शिकायत करते हुए कहा कि वह कश्मीर में इतनी सारी मूर्तियों को देखकर परेशान है।[8]

हिंदू त्योहारों को निशाना बनाना कोई नई बात नहीं है। अक्टूबर 2024 में  News18 द्वारा प्रकाशित एक लेख[9] में हिंदू उत्सवों पर हाल के हमलों का विस्तृत इतिहास दिया गया है। 22 जनवरी, 2024 को, अयोध्या राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दिन, कम से कम 10 राम मंदिर शोभा यात्राओं पर हमला किया गया। वहीं 2015 और 2023 के बीच, ओडिशा, झारखंड, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में हनुमान जयंती के जुलूसों के दौरान 27 हमले दर्ज किए गए। यहाँ तक कि 2024 में गणेश चतुर्थी समारोह को भी इस्लामी समूहों द्वारा कम से कम 15 बार बाधित किया गया। परशुराम जयंती और नाग पंचमी जैसे कम प्रसिद्ध त्योहारों को भी इसी तरह के वैमनस्य का सामना करना पड़ा है।

सितंबर 2024 में एक ऑपइंडिया लेख[10] ने दिवाली के दौरान हिंदुओं पर बढ़ते हमलों का विश्लेषण किया, जिसमें 2005 और 2024 के बीच घटित होने वाली 24 घटनाओं का दस्तावेजीकरण किया गया। इनमें दिल्ली में 2005 की दिवाली पर हुआ भीषण बम विस्फोट शामिल था, जिसमें 62 लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हो गए। 2017 में, कश्मीर में एक कश्मीरी पंडित परिवार पर दिवाली के दीये जलाने पर कथित तौर पर हमला किया गया था। उसी वर्ष, पूर्वी दिल्ली में हो रहे एक दिवाली समारोह के दौरान गोलीबारी होने लगी, जिससे वहाँ सम्मिलित लोगों के दिल में दहशत बैठ गयी।

ये घटनाएँ हिंदुओं के त्योहारों के दौरान उनके प्रति बढ़ती शत्रुता और हिंसा की एक चिंताजनक तस्वीर पेश करती हैं। ये केवल अलग-थलग घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि हिंदू सांस्कृतिक और धार्मिक अभिव्यक्तियों को निशाना बनाने वाले धमकी, उत्पीड़न और हमलों के एक व्यापक और व्यवस्थित पैटर्न का हिस्सा हैं।

 हिंदू-घृणा एक वैश्विक उद्यम है

 हिंदू त्योहारों को निशाना बनाना सिर्फ़ भारत तक सीमित नहीं है। शेख हसीना सरकार के गिरने और उसके बाद कट्टरपंथी इस्लामी समूहों के उदय के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं को क्रूर हिंसा का सामना करना पड़ा है। अक्टूबर 2024 में, इन समूहों ने दुर्गा पूजा से पहले हिंदू मंदिरों और पूजा समितियों को जबरन वसूली की धमकियाँ जारी कीं। देश भर में माँ दुर्गा की मूर्तियों के साथ बर्बरता के कई मामले सामने आए, जिससे बांग्लादेश में हिंदुओं की बदतर होती दुर्दशा पर प्रकाश डाला गया।[11]

हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए डोनाल्ड ट्रम्प बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाकर की जाने वाली कट्टरपंथी इस्लामी हिंसा के मुद्दे को उजागर करने वाले पहले प्रमुख विश्व नेता बन गए। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रम्प ने कहा, “मैं हिंदुओं, ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ की जाने वाली बर्बर हिंसा की कड़ी निंदा करता हूँ, जिन पर बांग्लादेश में भीड़ द्वारा हमला किया जा रहा है और लूटपाट की जा रही है, जो पूरी तरह से अराजकता की स्थिति में है।”[12]

वैश्विक स्तर पर ऐसी घटनाएँ अब आम होती जा रही हैं। नवंबर 2024 में खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने दिवाली मनाने वाले हिंदुओं के खिलाफ़ धमकियाँ देते हुए एक वीडियो जारी किया। ऑपइंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पन्नू ने चेतावनी दी कि हिंदुओं को पटाखे फोड़ने से बचना चाहिए, और अगर ऐसा कोई उत्सव मनाया गया तो कई मंदिरों पर हमला किया जाएगा।[13]

ये धमकियाँ कोरी बयानबाजी नहीं थीं। 2024 के दिवाली सप्ताहांत के दौरान, खालिस्तानी चरमपंथियों ने कनाडा के ब्रैम्पटन में हिंदू सभा मंदिर में एक भारतीय वाणिज्य दूतावास शिविर पर हमला किया, हिंसक रूप से कार्यक्रम को बाधित किया और महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाया।[14]

वाद को और बढ़ाते हुए, कनाडा के विपक्ष के नेता, पियर पोलीवर ने भारत और कनाडा के बीच चल रहे राजनयिक तनाव का हवाला देते हुए दिवाली कार्यक्रम से खुद को अलग कर लिया। हालाँकि इस कदम की कनाडा के हिंदू समुदाय ने तीखी आलोचना की, जिसने इसे अपनी पहचान और संस्कृति के खिलाफ़ एक अपमान के रूप में देखा। हिंदू समूहों ने तर्क दिया कि पोलीवर का  फैसले एक ऐसे रवैये को दर्शाता है जो हिंदुओं को एक ऐसे देश में “बाहरी” के रूप में पेश करता है, जो बहुसंस्कृतिवाद पर गर्व करता है।[15] हालांकि पोलीवर का यह फ़ैसला कथित तौर पर भारत और कनाडा के बीच चल रहे कूटनीतिक विवादों से जुड़ा था, लेकिन इसके पीछे अंतर्निहित स्वर भू-राजनीति के बजाय हिंदू-विरोध से जुड़ा हुआ प्रतीत होता था।

यहाँ दिए गए उदाहरण हिंदुओं के त्योहारों के दौरान उनके खिलाफ़ हिंसा, उत्पीड़न और धमकी की एक बहुत बड़ी और तेज़ी से बढ़ती प्रवृत्ति का एक छोटा सा नमूना हैं। इन घटनाओं की व्यवस्थित प्रकृति हिंदू सांस्कृतिक और धार्मिक प्रथाओं को लक्षित करने और उन्हें कमज़ोर करने के व्यापक प्रयास को प्रकट करती है।

पश्चिमी मीडिया की मिलीभगत

इस पूरे प्रकरण में पश्चिमी मीडिया का पाखंड एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में स्पष्ट तौर पर उभर कर आता है, जो लगातार हिंदुओं के खिलाफ़ हिंसा की घटनाओं की रिपोर्ट करने या पर्याप्त रूप से कवर करने में विफल रहा है। पश्चिमी मीडिया तंत्र हिंदू विरोधी घटनाओं को अक्सर पक्षपाती और खारिज करने वाले दृष्टिकोण से पेश करता है। जब हिंदू जुलूस या त्योहार हिंसा से बाधित होते हैं, तो मीडिया कवरेज अक्सर यह संकेत देती हैं कि हिंदुओं ने खुद ऐसी प्रतिक्रियाओं को भड़काया। यह गलत दिशा वास्तविक मुद्दे – हिंदुओं के खिलाफ़ गहरी नफरत – से ध्यान हटाकर “हिंदुत्व बहुसंख्यकवाद” जैसे राजनीतिक रूप से आरोपित आख्यानों की ओर ले जाती है। इस बात का एक उल्लेखनीय उदाहरण 13 अक्टूबर, 2024 को दुर्गा विसर्जन जुलूस के दौरान भारत के बहराइच में 22 वर्षीय राम गोपाल मिश्रा की नृशंस हत्या पर अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की चुप्पी है। मिश्रा को एक इस्लामी भीड़ ने निर्ममता से मार डाला था, फिर भी हिंसा का यह बर्बर कृत्य प्रमुख पश्चिमी मीडिया की सुर्खियों में जगह बनाने में विफल रहा।[16]

अगर मिश्रा अल्पसंख्यक समुदाय से होते, तो वैश्विक मीडिया की प्रतिक्रिया संभवतः बहुत अलग होती, जिससे व्यापक आक्रोश और लंबी कवरेज होती। यह असमानता सांप्रदायिक हिंसा की रिपोर्टिंग में एक परेशान करने वाले पूर्वाग्रह को उजागर करती है, जो अक्सर हिंदू पीड़ितों को वैश्विक ध्यान के हाशिये पर धकेल देती है। इस तरह की चुनिंदा रिपोर्टिंग न केवल मिश्रा जैसे पीड़ितों को न्याय से वंचित करती है, बल्कि एक पक्षपातपूर्ण विमर्श को भी बढ़ावा देती है जो हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को निहित रूप से उचित ठहराता है या कम करके आंकता है।

अल्पसंख्यक समूहों, खास तौर पर मुस्लिमों, पर हमलों की घटनाओं को लेकर मीडिया द्वारा दिखाई जाने वाली उत्साहपूर्ण कवरेज की तुलना में, हिंदू पीड़ितों के मामलों पर मीडिया की चुप्पी और भी अधिक चिंताजनक हो जाती है। जहां अन्य घटनाओं को प्रमुखता और सहानुभूति के साथ प्रस्तुत किया जाता है, वहीं हिंदू पीड़ितों की पीड़ा को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है या मामूली फुटनोट में सिमटा दिया जाता है।

इन हमलों को लगातार कम करके दिखाने से वैश्विक मीडिया न केवल हिंदुओं के संदर्भ में उपेक्षा को बढ़ावा देता है बल्कि अपराधियों को प्रोत्साहित भी करता है। हिंदुओं के खिलाफ हिंसा पर ध्यान न देने या निंदा न करने से ऐसा माहौल बनता है, जहां ऐसे कृत्यों को सामान्य माना जाता है और उन्हें खारिज कर दिया जाता है। गलत दिशा में ले जाने वाले बयानों को बढ़ावा देने और जानबूझकर इन हमलों को कम करके दिखाने से मीडिया भी इस हमले में भागीदार बन जाता है, जिससे हिंदू घृणा को अनियंत्रित रूप से बढ़ने के लिए उपजाऊ ज़मीन मिल जाती है। यह चुप्पी और विकृति सत्य और न्याय के साथ विश्वासघात से कम नहीं है।

हिंदू त्योहारों पर वोक संस्कृति का प्रहार

 दिवाली, होली और करवा चौथ जैसे हिंदू त्योहारों के इर्द-गिर्द वोक सद्गुण संकेत यानि ज़बरदस्ती कि virtue signalling एक पूर्ण विकसित उद्योग बन गया है। जैसे-जैसे ये त्यौहार नज़दीक आते हैं, हिंदुओं पर हर प्रकार की सलाह की बौछार सी होने लगती है—दिवाली के दौरान पटाखे न जलाएँ, होली के लिए पर्यावरण के अनुकूल रंगों का उपयोग करें, पानी बचाएँ, दिवाली पर मिठाइयों से बचें और कार्बन फुटप्रिंट्स को कम करने के लिए उपहारों का आदान-प्रदान न करें। जबकि ऐसी सलाह अक्सर पर्यावरण या सामाजिक कल्याण को लेकर होने वाली तथाकथित चिंता की चाशनी में लिपटी होती है, यह बात अपने आप में ही इसमें निहित प्रोपोगैंडा को स्पष्ट करती है कि अन्य त्योहारों या वैश्विक प्रथाओं के संदर्भ में इस प्रकार का आलोचनात्मक रवैया नहीं अपनाया जाता।

‘स्टॉप हिंदूद्वेष’ द्वारा प्रकाशित पिछले लेख में इस बात पर प्रकाश डाला गया था कि कैसे पश्चिमी मीडिया लगातार हिंदू त्योहारों का विकृतीकरण करता है, और अक्सर प्रदूषण और पितृसत्ता के दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है। विस्तृत जानकारी के लिए पाठक पूरा लेख पढ़ सकते हैं।[17]

हिंदू त्योहारों को लगातार निशाना बनाना और उनसे जुड़ी परंपराओं को जबरन धर्मनिरपेक्ष बनाने की कोशिश एक गंभीर प्रवृत्ति को उजागर करती है। यह प्रवृत्ति न केवल हिंदुओं की सांस्कृतिक और धार्मिक अभिव्यक्तियों को कमजोर करती है, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से उनके त्योहारों के दौरान होने वाले हमलों को वैधता प्रदान करती है। वहीं, पश्चिमी मीडिया, जो अक्सर हिंदू त्योहारों को शैतानी और प्रदूषणकारी कहकर नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करता है, उन्हीं आयोजनों के दौरान हिंदुओं पर होने वाली हिंसा पर चुप्पी साध लेता है। इस मौन रवैये से हिंदू विरोधी समूहों को और प्रोत्साहन मिलता है, जिससे वे वैश्विक स्तर पर हिंदू विरोधी गतिविधियों को बिना किसी डर या रोक-टोक के अंजाम दे पाते हैं। हिंदुओं पर हमलों को नजरअंदाज करना और उनके त्योहारों को विकृत रूप में पेश करना एक गहरी और खतरनाक हिंदू विरोधी मानसिकता को उजागर करता है। यह मानसिकता एक सूक्ष्म लेकिन कपटी माहौल तैयार करती है, जो ऐसी हिंसा को बढ़ावा देने और उसे उचित ठहराने के लिए जमीन तैयार करती है।

नेटवर्क कॉन्टैगियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (NCRI) की 2022 की रिपोर्ट में सोशल मीडिया पर हिंदू विरोधी गलत सूचनाओं के बड़े पैमाने पर प्रसार का खुलासा किया गया है। 2023 में एक अनुवर्ती अध्ययन ने ऑनलाइन अभद्र भाषा और हिंदुओं के खिलाफ वास्तविक दुनिया में होने वाली हिंसा के बीच एक मजबूत संबंध स्थापित किया। हिंदुओं और उनके त्योहारों को लक्षित करने वाले मीम्स, चुटकुले और गालियाँ इस कुचक्र को बढ़ावा देती हैं, ठीक वैसे ही जैसे यहूदी विरोधी हिंसा के संदर्भ में देखा गया।[18]

हिंदू त्योहारों को लक्षित करने वाले असंवेदनशील पोस्ट सोशल मीडिया पर आम हो गए हैं, जिनमें नवरात्रि के बारे में अपमानजनक चुटकुलों से लेकर हिंदू परंपराओं का मज़ाक उड़ाने वाली गालियाँ शामिल हैं। ऐसी सामग्री हिंदू विरोधी पूर्वाग्रह को सामान्य बनाती है और ऐसे माहौल को बनाने में योगदान देती है जहाँ हिंदुओं के खिलाफ़ होने वाली हिंसा उचित लगने लगती है। इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए ऑनलाइन सोशल मीडिया विमर्श और हिंदुओं पर ऑफलाइन दुनिया में होने वाले वास्तविक हमलों के बीच संबंधों पर शोध का विस्तार करना आवश्यक है।

हिंदू त्योहारों के इर्द-गिर्द वोक समुदाय द्वारा बनावटी सद्गुण संकेत का संदेश देना और हिंदू परंपराओं को रूढ़िबद्ध बताना इन समारोहों के दौरान हिंदुओं पर होने वाले शारीरिक हमलों जितना ही हानिकारक है। अकादमिक, मीडिया और सांस्कृतिक आख्यान अक्सर हिंदू विरोधी विचारों को बढ़ावा देते हैं, और अप्रत्यक्ष रूप से उसी माहौल को बनाए रखते हैं जो समुदाय के खिलाफ हिंसा को सक्षम बनाता है।

हिंदू त्योहारों के दौरान हिंदुओं को जबरन दिये जाने वाले सद्गुण प्रवचन और हिंदुओं पर होने वाले सीधे हमले, दोनों का एक ही उद्देश्य है: हिंदुओं को उनकी परंपराओं का उत्सव मनाने से हतोत्साहित करना। सद्गुण संकेत वैचारिक हिंदूफोबिया के स्तर पर काम करता है, और हिंदुओं को उनकी संस्कृति से अलग करने के लिए एक मनगढ़ंत कहानी गढ़ता है। जब ऐसी कहानियाँ अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में विफल हो जाती हैं, तो वे अक्सर खुलेआम धमकी और हिंसा में बदल जाती हैं।

समापन

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के 10 डाउनिंग स्ट्रीट में आयोजित दिवाली रिसेप्शन में विवाद तब शुरू हुआ जब ब्रिटिश हिंदू समुदाय के सदस्यों ने मेनू में शराब और मांसाहारी स्नैक्स शामिल किए जाने पर चिंता व्यक्त की। हिंदू समूहों ने सांस्कृतिक संवेदनशीलता और समावेशिता की आवश्यकता पर ज़ोर  दिया, और बताया कि इस तरह के समारोहों की मेजबानी करने से पहले सामुदायिक संगठनों और धार्मिक नेताओं से परामर्श करना ऐसी चूकों से बचने के लिए महत्वपूर्ण है।[19]

हिंदू संगठन INSIGHT UK ने अपने X (पूर्व में Twitter) हैंडल पर इस मुद्दे को उजागर किया, और लोगों को याद दिलाया कि दिवाली केवल एक उत्सव का अवसर नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक महत्व भी बहुत गहरा है। संगठन ने मेनू की आलोचना करते हुए कहा कि यह त्योहार से जुड़ी धार्मिक परंपराओं के प्रति समझ और सम्मान की कमी को दर्शाता है।[20]

यह घटना एक व्यापक मुद्दे को रेखांकित करती है: हिंदू त्योहारों और परंपराओं के प्रति सांस्कृतिक संवेदनशीलता की कमी। समझ में यह अंतर हिंदू त्योहारों के इर्द-गिर्द वैश्विक आख्यान को फिर से परिभाषित करने की तत्काल आवश्यकता को उजागर करता है।

हिंदू त्योहारों के खिलाफ व्याप्त वैश्विक वोक प्रचार को चुनौती देना अधिक सम्मानजनक और समावेशी प्रवचन बनाने के लिए आवश्यक है। एक सक्षम कथानक को बढ़ावा देकर, हम न केवल हिंदू परंपराओं के बारे में अधिक समझ विकसित कर सकते हैं, बल्कि उनके त्योहारों के दौरान हिंदुओं पर हमलों की बढ़ती प्रवृत्ति को भी हतोत्साहित कर सकते हैं। कथानक को बदलना यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक आवश्यक कदम है कि हिंदू सांस्कृतिक और धार्मिक प्रथाओं का दुनिया भर में सम्मान किया जाए।

संदर्भ 

[1] Anti-Hindu graffiti appears on BAPS temple in US, 2nd incident in 10 days | World News – Business Standard; https://www.business-standard.com/world-news/anti-hindu-graffiti-appears-on-baps-temple-in-us-2nd-incident-in-10-days-124092600694_1.html

[2] UK: Masked, hooded man vandalises Eelapatheshwarar Shiva temple in Wembley while reciting Islamic verses;  https://organiser.org/2024/01/11/215780/world/uk-masked-hooded-man-vandalises-eelapatheshwarar-shiva-temple-in-wembley-while-reciting-islamic-verses/

[3] Pro-Khalistani attack on Canada Hindu temple: Thousands march in solidarity in Brampton city – India Today;  https://www.indiatoday.in/world/canada-news/story/pro-khalistani-attack-canada-hindu-temple-thousands-march-solidarity-brampton-2628179-2024-11-05

[4] Clash over Diwali decoration in Navi Mumbai building; Society chairman detained – Times of India; https://timesofindia.indiatimes.com/city/navi-mumbai/two-groups-clash-over-lighting-up-building-for-diwali-society-chairman-detained/articleshow/114771187.cms

[5] Faridabad: Muslim mob attacks Hindu family for bursting firecrackers on Diwali, molests young girl, victim family puts up ‘house for sale’ poster – OpIndia; https://www.opindia.com/2024/11/faridabad-muslim-mob-attacks-hindu-family-for-bursting-firecrackers-on-diwali-molests-young-girl/#:~:text=In%20Faridabad%2C%20Haryana%2C%20a%20Hindu%20family%20was%20reportedly,mob%20led%20by%20two%20men%2C%20Raj%20and%20Ashiq.

[6] Tension grips Jamia as event to mark Diwali marred by slogans; security beefed up – News 9 Live; https://www.news9live.com/india/tension-grips-jamia-as-event-to-mark-diwali-marred-by-slogans-security-beefed-up-2730471

[7] Communal tension, clashes, after one killed in Bahraich – Hindustan Times; https://www.hindustantimes.com/india-news/communal-tension-clashes-after-one-killed-in-bahraich-101728932638217.html

[8] Mood off over Hindu idol, Diwali celebration’: Young man’s rant at Srinagar’s Lal Chowk sparks outrage – Newsable Asianet News; https://www.msn.com/en-in/news/India/mood-off-over-hindu-idol-diwali-celebration-young-mans-rant-at-srinagars-lal-chowk-sparks-outrage-watch/ar-AA1tpsS8

[9] Opinion | Bahraich Violence and a Brief History of Recent Attacks on Hindu Festivals – News 18;

https://www.news18.com/opinion/opinion-bahraich-violence-and-a-brief-history-of-recent-attacks-on-hindu-festivals-9090295.html

[10] Stone peltings, clashes and more: 17 attacks in 9 days on Hindu celebration of Ganesh Puja by Islamists across India and Bangladesh – OpIndia; https://www.opindia.com/2024/09/stone-peltings-clashes-and-more-multiple-attacks-on-hindu-celebration-of-ganesh-puja-by-islamists-across-india-and-bangladesh/

[11] The violence in Bangladesh after Hasina’s ouster stirs fear within the country’s Hindu minority – World News; https://apnews.com/article/bangladesh-violence-hindu-sheikh-hasina-85fe6619c38e1b07e407441cb054a74e

[12] Trump sends Diwali greetings, condemns attacks on Hindus in Bangladesh – The Economic Times;  https://economictimes.indiatimes.com/news/international/world-news/trump-sends-diwali-greetings-condemns-attacks-on-hindus-in-bangladesh/articleshow/114830976.cms?from=mdr

[13] US-supported Khalistani terrorist Pannun threatens to attack Hindu temples for fireworks on Diwali;  https://www.opindia.com/2024/11/us-supported-khalistani-terrorist-pannun-threatens-to-attack-hindu-temples-for-fireworks-on-diwali/

[14] Brampton: Thousands take out solidarity rally against attacks on Hindu temples in Canada; https://ddnews.gov.in/en/brampton-thousands-take-out-solidarity-rally-against-attacks-on-hindu-temples-in-canada/

[15] Hindus in Canada feel betrayed as Opposition leader Pierre Poilievre pulls out of Diwali event – India Today;  https://www.indiatoday.in/world/story/canadia-hindus-betrayed-leader-of-opposition-leader-pierre-poilievre-conservative-party-withdraw-from-diwali-event-2625532-2024-10-30

[16] Ram Gopal Mishra, who was killed by Islamist mob in Bahraich, was married just 2 months ago, belonged to a poor family;  https://www.opindia.com/2024/10/ram-gopal-mishra-killed-islamist-mob-bahraich-married-2-months-belonged-poor-family/

[17] From Diwali to Holi: The Media War on Hindu Festivals; https://stophindudvesha.org/from-diwali-to-holi-the-media-war-on-hindu-festivals/

[18] Hinduvdesha and UN’s Double Standard; https://stophindudvesha.org/hindudvesha-and-uns-double-standard/

[19] Hinduvdesha and UN’s Double Standard; https://stophindudvesha.org/hindudvesha-and-uns-double-standard/

[20] INSIGHT UK on X;   https://x.com/INSIGHTUK2/status/1854996915542536360

Rati Agnihotri
Rati Agnihotri
Rati Agnihotri is an independent journalist and writer currently based in Dehradun (Uttarakhand). Rati has extensive experience in broadcast journalism, having worked as a Correspondent for Xinhua Media for 8 years. She has also worked across radio and digital media and was a Fellow with Radio Deutsche Welle in Bonn. Rati regularly contributes articles to various newspapers, journals and magazines. Her articles have been recently published in "Firstpost", "The Sunday Guardian", " Organizer", OpIndia", "Hindupost", "Garhwal Post", "Sanatan Prabhat", etc. Rati writes extensively on issues concerning politics, geopolitics, Hindu Dharma, culture, society, etc. The points of intersection between geopolitics and culture are of special interest to her. A lot of her work explores issues concerning Bharat's civilizational and cultural ethos from a global perspective. She obtained her master’s degree in International Journalism from the University of Leeds, UK and a BA (Hons) English Literature from Miranda House, Delhi University. Rati is also a bilingual poet (English and Hindi) with two collections of English poetry to her credit. Her first poetry collection "The Sunset Sonata" has been published by Sahitya Akademi, India's National Academy of Letters. Her second poetry book "I'd like a bit of the Moon" has been published by Red River.
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