बस अब और नहीं! सदियों से चले आ रहे हिंदूद्वेष के विरुद्ध वैश्विक संग्राम

हिंदू समाज को कई सदियों से अपने धर्म और संस्कृति को खोने का दुख झेलना पड़ा है। कभी मंदिर तोड़े गए, कभी धार्मिक प्रतीकों का अपमान हुआ, और कभी स्कूलों की किताबों में भारतीय सभ्यता को गलत तरीके से दिखाया गया। लेकिन अब एक नई जागरूकता फैल रही है — जो सच को अपनाती है, अन्याय के खिलाफ खड़ी होती है और सनातन धर्म की विरासत को दोबारा जीवित करने की कोशिश कर रही है।
  •  जैसे-जैसे हिंदुओं के खिलाफ नफरत (जिसे प्रणालीगत हिंदूफोबिया कहा जा सकता है) बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे दुनिया भर के हिंदू मिलकर ऐसे हिंदू-विरोधी विचारों का सामना कर रहे हैं, जो औपनिवेशिक सोच और वामपंथी-उदारवादी नजरिए से पैदा हुए हैं।
  • पिछले कुछ वर्षों में एक वैकल्पिक, धर्म आधारित सोच विकसित हुई है, जिससे हिंदू समाज को अपने मुद्दों पर साफ़ तौर पर और आत्मविश्वास से बोलने की ताकत मिली है।
  • अब एक वैश्विक हिंदू नेटवर्क तैयार हो गया है, जो मजबूती से हिंदुओं से जुड़े मामलों को सामने लाता है और इनके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने में लगा है।
  • हिंदू अब गर्व से अपनी सभ्यता और संस्कृति को अपना रहे हैं और पूरी दुनिया में सनातन परंपरा के प्रतिनिधि बनकर उभर रहे हैं।
  • सोशल मीडिया के ज़रिए हिंदू न केवल नकारात्मक और झूठे प्रचार का जवाब दे रहे हैं, बल्कि डिजिटल दुनिया में अपनी मज़बूत मौजूदगी दिखा रहे हैं और इसे सांस्कृतिक संघर्ष का एक नया मंच बना रहे हैं। 

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ||  (श्रीमद्भगवद्गीता 4-7)

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्, धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥ (श्रीमद्भगवद्गीता 4-8)

(“जब जब भी धर्म का ह्रास होता है और अधर्म बढ़ता है, तब मैं अच्छाई की रक्षा करने, बुराई का नाश करने और धर्म के मार्ग को पुनः स्थापित करने के लिए स्वयं प्रकट होता हूँ।”)

हिंदू विचारधारा में, समय एक चक्रीय पैटर्न का अनुसरण करता है, और प्रत्येक युग, या काल, तब एक संवेदनशील बिंदु पर जा पहुँचता है जब बुराई की ताकतें धार्मिकता को पीछे छोड़ना शुरू कर देती हैं। भगवद गीता के ये विद्वतापूर्ण  श्लोक हमें याद दिलाते हैं कि ऐसे निर्णायक मोड़ पर, असंतुलन को चुनौती देने और नैतिक व्यवस्था को फिर से स्थापित करने हेतु एक पुनर्स्थापनात्मक शक्ति अनिवार्य रूप से उभरती है। इस श्लोक में निहित सांकेतिक संदेश यह है कि बुराई को चुपचाप सहन नहीं किया जाना चाहिए बल्कि इसके लिए सक्रिय प्रतिरोध की आवश्यकता होती है।

वैश्विक हिंदू प्रतिरोध और पुनरुत्थान की वर्तमान लहर को इन श्लोकों के माध्यम से बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। हिंदू विरोधी भावना (हिंदूद्वेष) के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के साथ ही, दुनिया भर के हिंदू औपनिवेशिक और वाम-उदारवादी आख्यानों के खिलाफ़ आवाज़ उठाने लगे हैं, जिन्होंने लंबे समय से उनकी संस्कृति और सभ्यता को कमज़ोर किया है।

हज़ारों सालों से वैदिक संस्कृति पर लगातार हमले होते रहे हैं। भारत की आज़ादी के बाद भी हिंदू समाज को पश्चिमी सोच और नए तरह के सांस्कृतिक दबावों का सामना करना पड़ा। ये दबाव अक्सर पुराने औपनिवेशिक नजरिए से जुड़े रहे। लेकिन पिछले दस सालों में हालात बदलने लगे हैं। अब हिंदू समाज एकजुट होकर अपनी बात कह रहा है, पुरानी कहानियों और धारणाओं को चुनौती दे रहा है, और दुनिया भर की संस्थाओं में मौजूद हिंदू-विरोधी रवैये के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहा है। ये जागरूकता सिर्फ़ भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी हिंदू समुदाय एकजुट हो रहा है और मिलकर ऐसे पूर्वाग्रहों का सामना कर रहा है।

इस लेख में हम इस बढ़ते हिंदू प्रतिरोध, इसकी पृष्ठभूमि, प्रेरक शक्तियों और इसकी बढ़ती वैश्विक उपस्थिति समस्त कई पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

वैश्विक हिंदू पुनरुत्थान

भारत का हिंदू समाज आज भी उस यूरोपीय उपनिवेशवाद की चोट झेल रहा है, जिसने लगभग 200 साल तक देश को गुलाम बनाए रखा। इसी दौर में कुछ पश्चिमी विद्वानों और तथाकथित इंडोलॉजिस्टों ने भारत और हिंदू धर्म को लेकर झूठे और पक्षपाती आख्यान गढ़े। इन दृष्टिकोणों ने पश्चिमी दुनिया में हिंदू धर्म को देखने का नजरिया तय कर दिया। आज भी कई आधुनिक पश्चिमी शिक्षाविद और विश्वविद्यालय इन्हीं बातों को दोहरा रहे हैं और उन्हें और मज़बूती से फैलाने का काम कर रहे हैं। वेंडी डोनिगर, शेल्डन पोलक, माइकल विट्ज़ेल और ऑड्रे ट्रुश्के (Wendy Doniger, Sheldon Pollock, Michael Witzel, Audrey Truschke) जैसे विद्वानों ने इन हिंदू-विरोधी सोचों को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।[1]

औपनिवेशिक सोच से प्रभावित होकर बहुत से भारतीय धीरे-धीरे अपनी समृद्ध संस्कृति और सभ्यता से दूर होते चले गए। इसकी जगह एक विकृत धर्मनिरपेक्षता ने ले ली, जिसमें अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण को प्राथमिकता दी गई और हिंदुओं की पहचान को नज़रअंदाज़ किया गया। इस माहौल ने हिंदू-विरोधी विचारों को पनपने का मौका दिया और एक मज़बूत वामपंथी-उदारवादी तंत्र खड़ा हुआ, जिसने इन विचारों को फैलाने और सामान्य बनाने का काम किया। मीडिया, शिक्षा और लोकप्रिय संस्कृति में गहराई से घुसकर इस समूह ने हिंदूफोबिया को मुख्यधारा बना दिया। यहाँ तक कि हिंदू पहचान की एक साधारण सी अभिव्यक्ति भी ‘पिछड़ी’, ‘असहिष्णु’ या ‘प्रगति-विरोधी’ समझी जाने लगी।

इसके बाद ‘वोकिज़्म’ का उदय हुआ – जो पूंजीवाद और अतिवादी वाम विचारों का मिला-जुला रूप है। इसने अलग-अलग ‘पीड़ित’ समूहों को एक विचारधारा के अंतर्गत लाकर, ‘उच्च जाति के हिंदुओं’ को सबसे बड़ा शोषक बताना शुरू कर दिया। इस प्रक्रिया में भारत का उपनिवेशवाद से जुड़ा वास्तविक दर्द भुला दिया गया और उल्टा हिंदुओं को ही हर अन्याय का जिम्मेदार ठहराया जाने लगा, चाहे उन्होंने वो अन्याय किया हो या नहीं। इस तरह वोकिज़्म ने पहचान की राजनीति को एक हथियार बनाकर इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा और झूठे नैरेटिव खड़े कर दिए।

‘स्नेक्स इन द गंगा: ब्रेकिंग इंडिया 2.0’ में राजीव मल्होत्रा और विजया विश्वनाथन बताते हैं कि कैसे पश्चिम की ‘क्रिटिकल रेस थ्योरी’ को ज़बरदस्ती भारत के जातिगत संदर्भ से जोड़ा जा रहा है। उनका तर्क है कि इस सिद्धांत का इस्तेमाल जानबूझकर तथाकथित उच्च जाति के हिंदुओं को वैश्विक भेदभाव का मूल कारण बताने के लिए किया जा रहा है — ताकि उन्हें एक ‘सामूहिक दोषी’ के रूप में पेश किया जा सके।

हाल के वर्षों में, हिंदूफोबिया अपने चरम पर पहुंच गया है। हिंदू धर्म को व्यवस्थित तरीके से टार्गेट करने की प्रक्रिया – जिसमें पश्चिमी देशों में मंदिरों की तोड़फोड़,[2]  हिंदू विरोधी घृणा अपराधों में वृद्धि और भारतीय संविधान के तहत हिंदुओं के साथ असमान व्यवहार (जैसे मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण[3] और वक्फ बोर्ड द्वारा अनियंत्रित भूमि अधिग्रहण) शामिल हैं – अब अपने चरम पर पहुँच गयी है। इसके अलावा हिंदू संस्कृति को कमतर आंकने वाले औपनिवेशिक युग के आख्यान, वामपंथी-उदारवादी और वोक हलकों द्वारा हिंदू विरोधी बयानबाज़ी का प्रसार, धर्मांतरण में वृद्धि, लव जिहाद की घटनाएं और बांग्लादेश जैसे देशों में हिंदुओं का लगातार उत्पीड़न, जैसे घटनाक्रम भी इसमें शामिल हैं।[4] [5]

हिंदू-विरोधी आख्यानों और लक्षित हमलों की बढ़ती लहर को देखकर, दुनियाभर के हिंदू अपनी पहचान और सभ्यता को फिर से पाने के लिए एकजुट हो रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीक़ों से संघर्ष कर रहे हैं। बीते दशक में एक नया वैकल्पिक आख्यान गढ़ने की दिशा में कई सार्थक पहलें हुई हैं — जो हिंदू धर्म की मूल दृष्टि, भारत की गहरी सांस्कृतिक परंपराओं और सभ्यतागत मूल्यों पर आधारित हैं। इस पुनर्जागरण का एक निर्णायक क्षण अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण रहा है, जिसने लंबे समय से स्थापित नैरेटिव को चुनौती दी। वर्षों तक पश्चिमी मीडिया, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों ने राम मंदिर आंदोलन को हिंदू ‘आक्रामकता’ के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने ऐसी कहानियाँ गढ़ीं जिनमें हिंदुओं को ऐसा दिखाया गया मानो वे धार्मिक प्रभुत्व के लिए एक मस्जिद गिरा रहे हों। लेकिन 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके बाद राम मंदिर के उद्घाटन ने इस झूठे नैरेटिव को तोड़ दिया। इससे न केवल ऐतिहासिक सच्चाई को न्याय मिला, बल्कि अयोध्या के संदर्भ में एक नए, अधिक संतुलित और आत्मगौरवपूर्ण आख्यान की नींव भी रखी गई।

साथ ही, हिंदू धर्म के प्रति भारत सरकार के दृष्टिकोण में भी उल्लेखनीय बदलाव आया है। हिंदू संस्कृति को अब सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है, प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है, और धार्मिक पर्यटन को महत्वपूर्ण समर्थन मिल रहा है। इन सभी प्रक्रियाओं ने इस महत्वपूर्ण मोड़ पर वैश्विक हिंदू समुदाय के भीतर एकता और एकीकरण की बढ़ती भावना को और अधिक सशक्त करने में एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वैश्विक हिंदू समुदाय की भूमिका

 दुनियाभर का हिंदू समुदाय अब भारत और विदेशों में हिंदुओं से जुड़े मुद्दों को उजागर करने में पहले से कहीं ज़्यादा सक्रिय हो गया है। अंतरराष्ट्रीय हिंदू संगठनों ने बांग्लादेश में यूनुस शासन के दौरान हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों की खुलकर निंदा की है और इन विषयों को वैश्विक मंचों तक पहुँचाने में अग्रणी भूमिका निभाई है। अलग-अलग देशों में मौजूद हिंदू संगठनों ने इन मुद्दों पर जनजागरूकता फैलाने, नीति निर्माताओं को सही जानकारी देने और बांग्लादेशी हिंदुओं के समर्थन में माहौल तैयार करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं।[6] [7]

अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद, जिसके कारण शेख हसीना देश से पलायन कर गयीं, वैश्विक हिंदू प्रवासियों ने हिंदुओं के चल रहे उत्पीड़न के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए कई शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। 11 अगस्त, 2024 को, दक्षिण एशियाई लोगों का एक बड़ा समूह बांग्लादेश के हिंदू समुदाय के साथ एकजुटता दिखाने के लिए कैलिफोर्निया के बे एरिया (Bay Area) में एकत्रित हुआ। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वाशिंगटन डी.सी., न्यूयॉर्क, अटलांटा, डलास, ह्यूस्टन और क्लीवलैंड सहित कई अन्य अमेरिकी शहरों में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन हुए।[8]

कनाडा के हिंदू समुदाय ने भी एकजुटता दिखाते हुए कई ऐसे विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। अगस्त 2024 में, हिंदू, बौद्ध, ईसाई और यहूदी पृष्ठभूमि के लोग न्याय की मांग करने और बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए टोरंटो शहर में एक साथ आए।[9] दिसंबर 2024 में, कनाडा के हिंदू समुदाय के सदस्यों ने टोरंटो में बांग्लादेशी वाणिज्य दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने भारत और कनाडा की सरकारों के साथ-साथ वैश्विक समुदाय से भी हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूनुस शासन पर दबाव बढ़ाने का आग्रह किया।[10] ऑस्ट्रेलिया[11], फ्रांस,[12] ब्रिटेन[13] और भारत[14] जैसे देशों में भी इसी तरह के कई विरोध प्रदर्शन हुए।

दुर्भाग्यवश, बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक 1971 से ही तीव्र भेदभाव और हिंसा के शिकार हैं जब देश अस्तित्व में आया, पश्चिमी पाकिस्तान (अब पाकिस्तान) के साथ 9 महीने की लड़ाई के बाद जिसमें अनुमानित 3 मिलियन लोग मारे गए और 2 मिलियन महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ, नवंबर 1971 तक 10 मिलियन बंगालियों ने भारत पलायन कर लिया, जिनमें से अधिकांश हिंदू थे।[15] शेख हसीना के शासन के दौरान, भारत-बांग्लादेश संबंधों के मज़बूत होने के परिणामस्वरूप हिंदू विरोधी हिंसा भड़काने के लिए ज़िम्मेदार  कट्टरपंथी इस्लामी नेटवर्क पर लगाम लगाने के कुछ प्रयास किए गए गये। हालांकि, हिंदुओं के ख़िलाफ़ होने वाले घृणा अपराध हसीना के कार्यकाल में भी एक संवेदनशील मुद्दा बने रहे। हाल के वर्षों में जो बड़ा परिवर्तन हुआ है, वह है वैश्विक हिंदू समुदाय की प्रतिक्रिया – अब हिंदू समुदाय इस तरह के उत्पीड़न को संबोधित करने और उजागर करने के लिए बहुत अधिक मुखर, संगठित और सक्रिय रुख अपनाता है। भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद शायद यह पहली बार है कि हिंदू समुदाय को इतने बड़े पैमाने पर संगठित होते देखा जा रहा है।

हिंदू प्रवासी भी हिंदू मुद्दों के संबंध में अपने-अपने देशों में नीति निर्धारण को प्रभावित करने में अब बेहद सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। 2023 में, जॉर्जिया हिंदूफोबिया या हिंदू विरोधी घृणा और पूर्वाग्रह के अस्तित्व को आधिकारिक रूप से मान्यता देने वाला पहला अमेरिकी राज्य बन गया।[16] अक्टूबर 2023 में, कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने एक बिल को वीटो कर दिया, जो कैलिफोर्निया को जाति-आधारित भेदभाव पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला अमेरिकी राज्य बना देता। इस भेदभावपूर्ण बिल को वीटो करना हिंदू अमेरिकी समुदाय के लिए एक बड़ी जीत थी, जिसने इस तरह के कानून के पारित होने के खिलाफ एक संगठित मोर्चे के अंर्तगत कठोर संघर्ष किया था।[17]

ब्रिटिश हिंदू समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण जीत में, ब्रिटिश हिंदू लेबर असेंबली के सदस्य कृपेश हिरानी के हिंदूफोबिया पर केंद्रित प्रस्ताव को नवंबर 2023 में लंदन असेंबली में सर्वसम्मति से पारित किया गया। हिरानी ने वेल्स और इंग्लैंड के अपराध सर्वेक्षण का हवाला दिया, जिसमें दिखाया गया कि हिंदू धार्मिक रूप से प्रेरित घृणा अपराध के शिकार होने वाले दूसरे सबसे संभावित धार्मिक समुदाय थे।[18] कनाडा में, हिंदू संगठन खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा मंदिरों पर किए जाने वाले हमलों सहित बढ़ते हिंदू विरोधी घृणा अपराधों के ख़िलाफ़ अपनी आवाज उठा रहे हैं।[19]

इसी तरह, भारत में हिंदू अपने समुदाय को प्रभावित करने वाले कई मुद्दों पर तेज़ी से मुखर हो रहे हैं। इनमें से प्रमुख हैं हिंदू मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण समाप्त करने की मांग और हिंदुओं के बढ़ते धर्मांतरण पर चिंता। लव जिहाद और भूमि जिहाद जैसे मुद्दों ने भी व्यापक बहस और सक्रियता को जन्म दिया है। अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों को हिंदू समुदाय को दोबारा सौंपने की माँग करने के लिए एक मज़बूत आंदोलन चल रहा है। खोए हुए मंदिरों को पुनः प्राप्त करने और प्राचीन हिंदू विरासत को पुनर्जीवित करने के प्रयास भी चल रहे हैं, जैसा कि संभल के मामले में देखा गया है। इसके अतिरिक्त, समुदाय बांग्लादेश में हिंदू विरोधी हिंसा, मंदिरों के अपवित्रीकरण, बढ़ते घृणा अपराधों और धार्मिक त्योहारों के दौरान हिंदू जुलूसों पर हमलों के खिलाफ़ सक्रिय रूप से अपनी आवाज़ उठा रहा है। हिंदू समुदाय द्वारा सक्रिय रूप से उठाया जा रहा एक और महत्वपूर्ण मुद्दा भारतीय शिक्षा प्रणाली में इस्लामी आक्रमणकारियों का निरंतर महिमामंडन है। कई लोग भारत के अतीत का  अधिक सटीक और संतुलित चित्रण सुनिश्चित करने के लिए इतिहास के पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव की मांग कर रहे हैं, जो स्वदेशी नायकों का सम्मान करे और सदियों के आक्रमणों और उपनिवेशीकरण के दौरान असंख्य भारतीयों द्वारा सही गयी यातनाओं और कष्टों को स्वीकार करे।

हिंदू अपनी संस्कृति और पहचान का गर्वपूर्ण दावा कर रहे हैं

पूरी दुनिया में हिंदू अपनी सांस्कृतिक जड़ों का खुलकर प्रदर्शन कर रहे हैं और सनातनी संस्कृति के ब्रांड एंबेसडर बन रहे हैं। हिंदू समुदय के संदर्भ में यह सबसे महत्वपूर्ण मूलभूत परिवर्तनों में से एक है क्योंकि जब कोई समुदाय खुले तौर पर अपनी सांस्कृतिक विरासत को अपनाता है और आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर इसका प्रदर्शन करता है, तो उस समुदाय के खिलाफ़ लक्षित नकारात्मक कथाएँ स्वाभाविक रूप से अपना प्रभाव और तीव्रता खोने लगती हैं।

पश्चिम में बिंदी और तिलक को सनातनी प्रतीकों के रूप में प्रदर्शित करना एक बढ़ते आंदोलन के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें उनके सांस्कृतिक महत्व का उत्सव मनाने के लिए समर्पित बाक़ायदा दिवस निर्धारित किए गए हैं। 15 अक्टूबर को अब अंतर्राष्ट्रीय बिंदी और तिलक दिवस के रूप में मनाया जाता है, एक परंपरा जो 2021 में दुनिया भर में हिंदू संगठनों और व्यक्तियों के प्रयासों से शुरू हुई थी। इसी तरह, विश्व बिंदी दिवस हर साल नवरात्रि के पहले दिन मनाया जाता है।[20]

इस तरह के उत्सव वामपंथी-उदारवादी तंत्र द्वारा फैलाए जा रहे हिंदू विरोधी दुष्प्रचार का मुकाबला करने में बहुत महत्व रखते हैं। तिलक और बिंदी जैसे सांस्कृतिक प्रतीक लंबे समय से हिंदू विरोधी तंत्र के लिये आसान लक्ष्य रहे हैं – उदाहरण के लिए, बॉलीवुड ने अक्सर खलनायकों को तिलक के साथ चित्रित किया है, जो सूक्ष्म रूप से इस प्रतीक को बदनाम करता है। इस बीच, पारंपरिक रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली बिंदी धीरे-धीरे गायब हो रही है, खासकर शहरी भारत में, आंशिक रूप से भारतीय महिलाओं के आधुनिक चित्रण में इसकी अनुपस्थिति के कारण। इसके जवाब में, वैश्विक हिंदू समुदाय अब इन सांस्कृतिक प्रथाओं को पुनः स्थापित कर इनका गर्वपूर्ण प्रदर्शन कर रहा है और उन आख्यानों को सक्रिय रूप से चुनौती दे रहा है जो भारतीय संस्कृति को कमज़ोर करने की कोशिश करते हैं।

अयोध्या राम मंदिर का उद्घाटन हिंदू सभ्यता और सांस्कृतिक पहचान के पुनरुद्धार में एक ऐतिहासिक मोड़ का प्रतीक है। यह हिंदू मुद्दों को देखने के तरीके में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है – न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर। मंदिर का निर्माण इस्लामी आक्रमणों के दौरान खोए गए पवित्र स्थलों को पुनः प्राप्त करने के लिए हिंदुओं द्वारा सदियों से किए जा रहे संघर्ष की परिणति है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अयोध्या शीर्षक विवाद में पहला कानूनी मामला लगभग 140 साल पहले दायर किया गया था, जिसकी दर्ज कानूनी कार्यवाही 1858 तक जाती है।[21] दुनिया भर में हिंदू प्रवासियों ने उद्घाटन का उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया,  और इसे ‘बुराई पर अच्छाई’ की जीत वाली कहावित को चरितार्थ करने वाले एक घटनाक्रम के रूप में देखा।

मार्च 2024 में, विश्व हिंदू परिषद ऑफ अमेरिका (VHPA) ने अपने कनाडाई समकक्ष के साथ मिलकर श्री राम रथ यात्रा का आयोजन किया, जिसमें कनाडा और अमेरिका के एक हज़ार से ज़्यादा हिंदू मंदिरों को शामिल किया गया।[22] अगस्त 2024 में, अयोध्या में राम मंदिर को दर्शाती एक झांकी न्यूयॉर्क में इंडिया डे परेड में शामिल हुई।

राम मंदिर की झांकी का प्रदर्शन अमेरिकी हिंदू समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण जीत थी, क्योंकि भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद (IAMC) ने कई अन्य समूहों के साथ मिलकर राम मंदिर की झांकी को शामिल करने के खिलाफ़ एक अभियान चलाया, जिसने  इसे “कट्टरता” और “मुस्लिम घृणा” का कृत्य करार दिया।[23]

संक्षेप में, दुनिया भर में हिंदू समुदाय तेज़ी से और गर्व के साथ अपनी सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान का प्रदर्शन कर रहा है – चाहे वह पश्चिमी देशों में दिवाली जैसे त्योहारों की आधिकारिक मान्यता के पक्ष में आवाज़ उठाना हो, हिंदू परंपराओं को लक्षित करने वाले वाम-उदारवादी आख्यानों के ख़िलाफ़ आवाज उठाना हो, प्राचीन विरासत को पुनः प्राप्त करना हो, या हिंदू पहचान के प्रतीकों को खुले तौर पर अपनाना और प्रदर्शित करना हो।

वोक-वामपंथी विचारधारा को चुनौती देना

 वामपंथी-उदारवादी तंत्र द्वारा फैलाए जा रहे हिंदू विरोधी आख्यानों को उजागर करने में भी हिंदू तेज़ी से मुखर हो रहे हैं। सोशल मीडिया, खास तौर पर एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स हिंदू प्रतिरोध के लिए एक प्रमुख स्थान बन गए हैं, जहां समुदाय के सदस्य वामपंथी-उदारवादी विचारधाराओं के भ्रामक आख्यानों को  सक्रिय रूप से चुनौती दे रहे हैं। यह ऑनलाइन प्रतिरोध विशेष रूप से ऐसे युग में महत्वपूर्ण है जहां सोशल मीडिया जनमत को आकार देता है और अक्सर आम धारणा को प्रभावित करने में मुख्यधारा के मीडिया से आगे निकल जाता है।

उदाहरण के लिए, INSIGHT UK[24] द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में हिंदू मुद्दों की  ब्रिटिश मीडिया कवरेज के बारे में ब्रिटिश हिंदू समुदाय की धारणा पर प्रकाश डाला गया है। अपने कई निष्कर्षों के बीच, सर्वेक्षण में यह भी पता चला कि 90 प्रतिशत से अधिक उत्तरदाताओं ने हिंदू मुद्दों पर अपने कवरेज में बीबीसी को सबसे गलत और पक्षपाती माना, इसके बाद 67 प्रतिशत ने द गार्जियन को सबसे पक्षपाती माना। सर्वे के नतीजों के अनुसार यह भी पता चलता है कि ब्रिटिश हिंदुओं द्वारा बीबीसी और गार्जियन के खिलाफ़ सबसे ज़्यादा शिकायतें उठाई गईं।

हिंदू प्रवासी समुदाय जातिगत भेदभाव को रोकने और खतरनाक और क्रूर हिंदू विरोधी रूढ़ियों की रोकथाम करने के नाम पर पश्चिम में हिंदू समुदाय को निशाना बनाने वाले वोक आख्यानों को चुनौती देने में भी सफल रहा है।[25] भारत में, हिंदू समुदाय लगातार भारतीय इतिहास, संस्कृति, सभ्यता आदि को लेकर पनप रहे वामपंथी-उदारवादी आख्यानों को चुनौती दे रहा है और इस प्रक्रिया में वैकल्पिक धार्मिक आख्यानों का प्रचार कर रहा है। इस संबंध में संभल एक उपयुक्त केस स्टडी है। स्थानीय हिंदू समुदाय शहर की हिंदू विरासत को पुनर्जीवित करने और इस प्रक्रिया में वामपंथी और इस्लामवादी आख्यानों को चुनौती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इसी तरह, लव जिहाद, धोखाधड़ी से लेकर धर्म परिवर्तन आदि, जैसी घटनाओं को लेकर हिंदुओं में अब काफी जागरूकता है। चूंकि कई भारतीय राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून हैं, इसलिए हिंदू अब इन घटनाओं के बारे में शिकायत दर्ज कराने में संकोच नहीं करते। जनवरी में, उत्तर प्रदेश के अंबेडकर जिले की एक विशेष अदालत ने कथित तौर पर एक ईसाई जोड़े को यूपी के सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत दोषी ठहराया।[26] [27] 2020 में उत्तर प्रदेश धर्मांतरण विरोधी कानून के लागू होने के बाद से, 31 जुलाई, 2024 तक इस अधिनियम के तहत कुल 835 मामले दर्ज किए गए हैं और 1,682 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।[28]

इक्वालिटी लैब्स[29] और हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स[30] जैसे हिंदू विरोधी संगठनों द्वारा हिंदू आख्यानों की रक्षा के नाम पर हिंदू विरोधी आख्यानों को जारी रखने के भ्रामक आख्यानों को भी समुदाय द्वारा प्रभावी ढंग से उजागर किया जा रहा है।

 निष्कर्ष

हिंदू समुदाय एक अनिश्चित संकट में फंस गया है। भारत में हिंदू धर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की राजनीति का ख़ामियाज़ा भुगत रहे हैं। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे इस्लामी देशों में हिंदू अपने जीवन को लेकर हमेशा भय की स्थिति में रहते हैं। दुनिया भर में हिंदू प्रवासी, खासकर पश्चिमी देशों पर मोदी सरकार की तथाकथित “हिंदू बहुसंख्यकवादी विचारधारा” का प्रचार करने का आरोप लगाया जाता है, अगर वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों पर जोर देते हैं और हिंदू मुद्दों पर मुखर होते हैं।

वोकिज्म ने हिंदू समुदाय के ख़िलाफ़ एक क्रूर एकीकृत मोर्चा बनाया है; वैश्विक कम्युनिस्टों, इस्लामवादियों, खालिस्तानियों आदि का एक अवसरवादी गठबंधन।

हालांकि, पिछले एक दशक में, एक बड़ा प्रतिमान बदलाव हुआ है, जिससे वैकल्पिक धार्मिक आख्यानों का उदय हुआ है। नतीजतन, हिंदू समुदाय ने एक नये सिरे से आत्मविश्वास हासिल किया है और अब वह हिंदू विरोधी वामपंथी-उदारवादी आख्यानों को साहसपूर्वक चुनौती दे रहा है, और सक्रिय रूप से एक मज़बूत हिंदू समर्थक विमर्श का निर्माण भी कर रहा है।

संदर्भ सूची 

[1] The Case for India’s Digital Sovereignty; https://stophindudvesha.org/the-case-for-indias-digital-sovereignty/

[2] BAPS Shri Swaminarayan Mandir: VHP condemns California temple vandalism, urges US for strict action | India News – The Times of India;  https://timesofindia.indiatimes.com/india/vhp-condemns-california-temple-vandalism-urges-us-for-strict-action/articleshow/118818240.cms

[3] State Control of Hindu Temples in India: A Historical Perspective;  https://stophindudvesha.org/state-control-of-hindu-temples-in-india-a-historical-perspective/

[4] [4]Hindu diaspora under attack: The rising trends of global Hinduphobia, attacks by Islamists and propaganda;  https://www.opindia.com/2022/10/global-hinduphobia-attacks-hindus-islamists-leicester-worrying-trend/

[5] Rising Hinduphobia: Global Surge in Anti-Hindu Violence Raises Alarms;   https://ddnews.gov.in/en/rising-hinduphobia-global-surge-in-anti-hindu-violence-raises-alarms/

[6] Protests erupt in Paris over anti-Hindu violence in Bangladesh;  https://www.opindia.com/2024/08/protests-erupt-in-paris-over-anti-hindu-violence-in-bangladesh/

[7] ‘Stop violence on Bangladeshi Hindus’: Airline banner floats in New York city skyline – Times of India;  https://timesofindia.indiatimes.com/world/us/stop-violence-on-bangladeshi-hindus-airline-banner-floats-in-new-york-city-skyline/articleshow/113925377.cms

[8] Hindu Diaspora Reacts To Bangladesh Violence; https://indiacurrents.com/bangladesh-hindu-violence-student-protestors-awami-leag/

[9] Canada: Thousands protest in Downtown Toronto over violence against Hindus in Bangladesh – World News – India TV;  https://www.indiatvnews.com/news/world/canada-thousands-of-protesters-protest-in-downtown-toronto-over-violence-against-hindus-in-bangladesh-sheikh-hasina-latest-updates-2024-08-11-946377

[10] Stop genocide’: Canadian Hindus stage protest outside Bangladesh consulate in Toronto – The Times of India;  https://timesofindia.indiatimes.com/world/south-asia/stop-genocide-canadian-hindus-stage-protest-outside-bangladesh-consulate-in-toronto/articleshow/116194865.cms

[11] Australia: Hindus protest in Melbourne against the atrocities on minorities in Bangladesh;https://organiser.org/2024/12/23/270495/world/australia-hindus-protest-in-melbourne-against-the-atrocities-on-minorities-in-bangladesh/

[12] [12]  Protests erupt in Paris over anti-Hindu violence in Bangladesh;   https://www.opindia.com/2024/08/protests-erupt-in-paris-over-anti-hindu-violence-in-bangladesh/

[13] Protesters Outside UK Parliament Condemn Violence Against Bangladeshi Hindus;  https://www.ndtv.com/world-news/uk-bangladesh-unrest-protesters-outside-uk-parliament-condemn-violence-against-bangladeshi-hindus-6311475

[14] Protests in Noida, Ghaziabad over anti-Hindu violence in Bangladesh – India Today;  https://www.indiatoday.in/india/story/protests-noida-ghaziabad-over-anti-hindu-violence-in-bangladesh-seeks-centres-action-2646722-2024-12-08

[15] 1971 Bengali Hindu Genocide – Hindu American Foundation;  https://www.hinduamerican.org/1971-bangladesh-genocide

[16] US: Georgia legislature passes resolution condemning Hinduphobia – The Economic Times;   https://economictimes.indiatimes.com/news/international/world-news/us-georgia-legislature-passes-resolution-condemning-hinduphobia/articleshow/99159280.cms?from=mdr

[17] California Governor returns ‘unnecessary’, Hinduphobic bill SB403;  https://www.opindia.com/2023/10/california-governor-gavin-newsom-returns-hinduphobic-bill-sb403-calls-it-unnecessary/

[18] Hinduphobia motion unanimously passed at the London Assembly – INSIGHT UK; https://insightuk.org/hinduphobia-motion-unanimously-passed-at-the-london-assembly

[19] Hindus in Canada protest against Khalistani attack on Brampton temple | World News – Hindustan Times; https://www.hindustantimes.com/world-news/hindus-in-canada-protest-against-khalistani-attack-on-brampton-temple-hindu-temple-attack-justin-trudeau-101730778110221.html

[20] Bindi and Tilak making a resurgence across India as symbols of Hindu renaissance;    https://hindupost.in/dharma-religion/bindi-and-tilak-making-a-resurgence-across-the-world-as-symbols-of-hindu-renaissance/

[21] Ayodhya case: A brief history of India’s longest running property dispute – The Economic Times; https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/ayodhya-case-a-brief-history-of-indias-longest-running-property-dispute/articleshow/71988076.cms?from=mdr#

[22] VHP organises Shri Ram Rath Yatra across US, Canada; aims to connect with Hindu temples – Times of India; https://timesofindia.indiatimes.com/nri/us-canada-news/vhp-organises-shri-ram-rath-yatra-across-us-canada-aims-to-connect-with-hindu-temples/articleshow/108759684.cms

[23] Ram Mandir float joins India Day Parade in New York amidst protests; Indian diaspora celebrates unity and diversity;  https://organiser.org/2024/08/20/252576/bharat/ram-mandir-float-joins-india-day-parade-in-new-york-amidst-protests-indian-diaspora-celebrates-unity-and-diversity/

[24] BBC and The Guardian most biased sources of news regarding Hindus and Bharat, says INSIGHT UK survey; https://hindupost.in/world/bbc-and-the-guardian-most-biased-sources-of-news-regarding-hindus-and-bharat-says-insight-uk-survey/

[25] In the US, caste being used as a ploy to soft-sell Hinduphobia – The Sunday Guardian Live; https://sundayguardianlive.com/opinion/in-the-us-caste-being-used-as-a-ploy-to-soft-sell-hinduphobia

[26]  UP: Christian couple sentenced 5 years in jail for mass conversion of Dalits;  https://www.opindia.com/2025/01/first-conviction-of-christian-evangelists-under-ups-anti-conversion-law-christian-couple-sentenced-to-5-years-in-prison-for-mass-conversion-of-dalits-read-the-court-verdict/

[27] Lucknow: Hindus protest against Christian conversion activities in Gomti Nagar church, locals say Christians buying land and houses at double price;  https://www.opindia.com/2025/02/lucknow-hindus-protest-against-christian-conversion-activities-in-gomti-nagar-church/

[28] [28]  835 cases, 1682 arrests: UP’s clampdown on unlawful religious conversions in four years;   https://www.moneycontrol.com/news/india/up-anti-religious-conversion-law-yogi-adityanath-cases-arrest-12792399.html

[29] A discriminatory affair: How Dalit advocacy group Equality Labs portrays Hindu religion as irredeemable in US – Firstpost;   https://www.firstpost.com/opinion/a-discriminatory-affair-how-dalit-advocacy-group-equality-labs-portrays-hindu-religion-as-irredeemable-in-us-12440202.html

[30]  HfHR asks London’s Mayor to ‘cut off all ties’ with Hindu institutions in UK that helped organise Diwali event;  https://www.opindia.com/2024/10/anti-hindu-hindus-for-human-rights-with-ties-to-islamists-calls-on-londons-mayor-to-cut-off-all-ties-with-hindu-institutions-that-helped-organise-diwali-event/

Rati Agnihotri
Rati Agnihotri
Rati Agnihotri is an independent journalist and writer currently based in Dehradun (Uttarakhand). Rati has extensive experience in broadcast journalism, having worked as a Correspondent for Xinhua Media for 8 years. She has also worked across radio and digital media and was a Fellow with Radio Deutsche Welle in Bonn. Rati regularly contributes articles to various newspapers, journals and magazines. Her articles have been recently published in "Firstpost", "The Sunday Guardian", " Organizer", OpIndia", "Hindupost", "Garhwal Post", "Sanatan Prabhat", etc. Rati writes extensively on issues concerning politics, geopolitics, Hindu Dharma, culture, society, etc. The points of intersection between geopolitics and culture are of special interest to her. A lot of her work explores issues concerning Bharat's civilizational and cultural ethos from a global perspective. She obtained her master’s degree in International Journalism from the University of Leeds, UK and a BA (Hons) English Literature from Miranda House, Delhi University. Rati is also a bilingual poet (English and Hindi) with two collections of English poetry to her credit. Her first poetry collection "The Sunset Sonata" has been published by Sahitya Akademi, India's National Academy of Letters. Her second poetry book "I'd like a bit of the Moon" has been published by Red River.
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