युद्ध में हारने पर पाकिस्तान ने चलाई सोशल मीडिया पर झूठ फैलाने की मुहिम
- भारत की सेना से हारने के बाद, पाकिस्तान ने अब सोशल मीडिया पर लड़ाई छेड़ दी है। AI बॉट्स, पुराने झूठ और शक वाले इन्फ्लुएंसर्स के ज़रिए वह झूठी कहानियाँ फैला रहा है
- हमले के बाद जब तक लोग मरे हुए गिने भी नहीं जाते, पाकिस्तान वाले पहले से ही फर्जी हैशटैग चलाने लगते हैं।
- भाड़े के इन्फ्लुएंसर, जो कई प्लेटफॉर्म्स से बैन हो चुके हैं, पाकिस्तान के डिजिटल हथियार बन गए हैं,जो अजीब-अजीब दावे करके भारत के खिलाफ झूठ फैलाते हैं।
- यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ऐसा कर रहा है। पुलवामा हमले से लेकर यूके के लीसेस्टर दंगों तक, मोहम्मद हिजाब और ज़ीशान अली जैसे लोग लगातार हिंदू-विरोधी नफरत फैलाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
- पाकिस्तान अब सोशल मीडिया पर कहानियाँ बनाकर लड़ाई लड़ रहा है। असली युद्धों में हारने के बाद अब वह इस गलतफहमी का शिकार है कि झूठ फैलाकर जीत पाएगा।
आज के दौर में, जब झूठी खबरें तेजी से फैलती हैं और इंटरनेट की पॉपुलैरिटी ही सबसे बड़ा हथियार बन चुकी है, पाकिस्तान ने भी सोशल मीडिया की लड़ाई में कूदने का फैसला कर लिया है। रावलपिंडी में खड़े पुराने टैंक और फोटो खिंचवाने के लिए खड़ी फाइटर जेट्स को छोड़कर, अब पाकिस्तान की असली जंग इंटरनेट पर लड़ी जा रही है।
लेकिन यहां कोई सीरियस कूटनीतिक चर्चा या खुफिया रिपोर्टिंग नहीं हो रही। नहीं जनाब, पाकिस्तान के 21वीं सदी के हथियार हैं: AI से बने नकली बॉट्स, बेवकूफी से भरे और ज़्यादा एडिट किए हुए मीम्स, और ऐसे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जो YouTube देखकर खुद को पॉलिटिकल एक्सपर्ट मान बैठे हैं। इनका बस एक ही मकसद है — दुनिया को ये यकीन दिलाना कि भारत में जितने भी आतंकी हमले होते हैं, वो सब खुद भारत ही करवाता है। यानी “जेम्स बॉन्ड” और “इन्फोवॉर्स” का मिश्रण, लेकिन कम बजट में।
पाकिस्तान का झूठ फैलाने वाला फॉर्मूला
मामला था पहलगाम का, जहाँ पाकिस्तान से आए इस्लामी आतंकियों ने 25 हिंदू पर्यटकों को उनके परिवारों के सामने मार डाला। भारत अभी शवों की पहचान ही कर रहा था कि पाकिस्तान के सोशल मीडिया योद्धा नई कहानी लेकर आ गए — “भारत ने खुद अपने लोगों को मारा!”[1]
जी हाँ, इस्लामाबाद के AI एक्सपर्ट्स का कहना था कि ये हमला भारत ने खुद करवाया, केवल दुनिया की सहानुभूति पाने के लिए। अब किसी सबूत की ज़रूरत किसे है, जब #BJPBehindPahalgam और #StopModiFascism जैसे हैशटैग सोशल मीडिया पर तैर रहे हों? पाकिस्तान किस तरह से योजनाबद्ध तरीके से झूठ फैलाता है, उसका तीन-क़दम का तरीका नीचे बताया गया है:
- पहला — हमले के तुरंत बाद, पाकिस्तान समर्थित अकाउंट्स कहने लगते हैं कि “भारत ने खुद पर हमला किया।”
- दूसरा — AI से बनाए गए हजारों मीम्स इंटरनेट पर डाल दिए जाते हैं, जो इतने झूठे और घटिया होते हैं कि हँसी आ जाए।
- तीसरा — कुछ वेस्टर्न इन्फ्लुएंसर आते हैं, जो हमेशा लोकतंत्र को दोष देने में जुटे रहते हैं। वो इस झूठ को पश्चिमी दर्शकों तक पहुंचाते हैं, क्योंकि उन्हें सरकारी बयान से ज़्यादा कोई पॉडकास्ट पसंद आता है।
इस अभियान का मकसद का केवल एक मकसद है कि पश्चिमी देशों में ऐसा माहौल बनाना कि वहां की सरकारें भारत पर दबाव डालें। इसके पीछे की सोच है कि अगर न्यू यॉर्क का कोई सिर फिरा स्टूडेंट मान ले कि भारत खुद हमले करवाता है, तो शायद वॉशिंगटन का कोई थिंक टैंक इंटर्न उस पर रिपोर्ट लिख दे। यह है पाकिस्तान की नई लड़ाई: सोशल मीडिया की हवा बनाकर अंतरराष्ट्रीय असर बनाने की कोशिश।
बॉट्स बने पाकिस्तान के नए योद्धा
अमेरिका की एक संस्था है NCRI, जो झूठी जानकारी पर नजर रखती है। उसने वो किया जिसकी पाकिस्तान को उम्मीद नहीं थी, यानि कि डेटा को ध्यान से देखा और विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि किस तरह फॉल्स फ्लैग थ्योरी यानी “भारत ने खुद पर हमला किया” जैसे झूठ फैलाए गए। जो सामने आया, वो था — पुराना प्रोपेगेंडा, AI से बनी बकवास, और ऐसे बेवकूफी से भरे फोटोशॉप, जिनसे किसी भी अक्लमंद इंसान को शर्म आए।
अपनी रिपोर्ट “From State Actors to Western Influencers…” में NCRI ने बताया कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले के कुछ ही घंटे बाद पाकिस्तान के लोग झूठा नैरेटिव फैलाने लगे।
पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने इस झूठ को सबसे पहले फैलाया। उन्होंने 22 अप्रैल की घटना के कुछ ही घंटों बाद X (ट्विटर) पर लिखा, “कश्मीरी मुजाहिदीन कभी आम लोगों को निशाना नहीं बनाते।”[2]
रिपोर्ट के मुताबिक, पहलगाम हमले के कुछ ही घंटों में फॉल्स फ्लैग थ्योरी को फैलाने वाले 20,000 से ज़्यादा पोस्ट X पर डाले गए। इनमें से 40% पोस्ट बॉट्स से थे, ऐसे AI टूल्स, जिनका काम बार-बार वही पांच झूठे मैसेज देना है, वो भी टूटी-फूटी अंग्रेज़ी और बड़े-बड़े अक्षरों में। इन बॉट्स ने AI की मदद से आतंकवाद को लेकर मीम्स भी बना डाले। जैसे कि नरेंद्र मोदी की तस्वीर को परमाणु विस्फोट के पास जोड़कर उस पर लिखा गया: “Modi Bombs Own Country?” और “INDIAN FALSE FLAG EXPOSED”। इस डिजिटल नौटंकी का मकसद है केवल सनसनी फैलाना।
अब यह तो कोई नहीं कह सकता कि बॉट्स जानते है कि वो झूठ बोल रहे हैं या उन्हें बस इंटरनेशनल ड्रामा करने का शौक है। लेकिन एक बात तो तय है कि ये बॉट्स पाकिस्तान की GDP से ज़्यादा भरोसेमंद हैं।
भाड़े के इन्फ्लुएंसर
बॉट्स भले ही डिजिटल पैदल सिपाही हों, लेकिन असली हमला तो इन्फ्लुएंसर लोग करते हैं। वही लोग जो पहले मेकअप ट्यूटोरियल और “मुकबांग” (कैमरे के सामने खाना खाते हुए लाइव वीडियो या रिकॉर्डिंग करना) वीडियो बनाते थे, अब खुद को युद्ध नीति का मास्टर समझने लगे हैं।
इस पूरी टोली का लीडर है जैक्सन हिंकल। 25 साल का ये अमेरिकी टिकटॉक योद्धा अब पाकिस्तान की ISI और रूस समर्थक प्रोपेगेंडा मशीनों का पसंदीदा चेहरा बन गया है।
हिंकल खुद को “MAGA कम्युनिस्ट” कहता है — दो ऐसे शब्द जो एक साथ बोलने में अजीब लगते हैं। उसे YouTube, Twitch और Instagram से बैन कर दिया गया है — शायद इसलिए क्योंकि उसकी बातें इतनी बेतुकी होती हैं कि ऐप्स भी परेशान हो जाएं। लेकिन X (ट्विटर) पर अब भी उसकी दुकान चल रही है, जहाँ उसके 30 लाख फॉलोअर्स उसकी हर बात पर सिर हिलाते हैं। इतने फॉलोअर्स के बावजूद, हिंकल को आज भी “ट्विटर का सबसे वायरल झूठ फैलाने वाले इन्फ्लुएंसर” का खिताब हासिल है।[3]
हिंकल हौथी विद्रोहियों की कॉन्फ्रेंस में शामिल हुआ, हिज़बुल्ला की तारीफें कीं, और एक हिज़बुल्ला नेता की अंतिम यात्रा में भी पहुँच गया। अगर झूठ फैलाने की पहचान एयरमाइल्स से मापी जाती, तो हिंकल “Troll Travel Alliance” का चेयरमैन होता।[4]
उसका पॉडकास्ट “Legitimate Targets” सुनने में जितना खतरनाक लगता है, असल में उतना ही षड्यंत्रों से भरा हुआ है, जहाँ हर धमाके के पीछे भारत को ही दोषी ठहराया जाता है, चाहे धमाका कहीं भी हुआ हो।
कुछ ही दिन बाद, जब पहलगाम हमला हुआ, पाकिस्तान के अब्दुल बासित ने एक हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू में फिर से वही पुराना “फॉल्स फ्लैग” वाला झूठ दोहराया। ये बयान उन्होंने हिंकल के ही लाइव स्ट्रीम पर दिया — उसी हिंकल के प्लेटफॉर्म पर, जिसकी इंगेजमेंट पहले ही 40% से ज़्यादा बॉट-जैसे व्यवहार वाली पाई गई है। इस तरह पाकिस्तान का झूठा नैरेटिव और भी ज़्यादा दुनिया भर की ऑडियंस तक पहुँच गया।
यह पाकिस्तान की पहली मीम जंग नहीं है
पाकिस्तान की ये मीमबाज़ी और बदनामी फैलाने वाली मुहिम कोई नई बात नहीं है। याद कीजिए पुलवामा[5], या इज़रायल-हमास संघर्ष के वक्त फैलाई गई झूठी खबरें? या फिर यूके में हुए लेस्टर दंगे, जहाँ सोशल मीडिया पर भड़काऊ बातें फैलाकर माहौल को आग लगा दी गई?[6]
NCRI के मुताबिक, मोहम्मद हिजाब और ज़ीशान अली जैसे कट्टर इन्फ्लुएंसर काफी समय से इस नैरेटिव युद्ध के फ्रंटलाइन पर हैं। इनका काम है हिंदुओं के खिलाफ झूठ फैलाना, और धर्म के नाम पर नफरत उगलना। और यह सब “एक्टिविज़्म” का मुखौटा पहनकर किया जाता है।
2022 में UK के लेस्टर में जब दंगे भड़के, तो यही दो लोग सबसे आगे थे। जहाँ एक ओर यूके का मल्टीकल्चरल मॉडल बैठा रह गया, वहीं यूट्यूब लाइव स्ट्रीम और पेट्रोल बम चल पड़े। अब उन्हीं “अनुभवों” की वजह से पाकिस्तान ने इन दोनों को अपने भारत-विरोधी प्रचार अभियान का हीरो बना दिया है।
ऑपरेशन सिंदूर बनाम कीबोर्ड योद्धा अभियान
जब भारत ने पहलगाम हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरु किया, तो वही पुराने ऑनलाइन योद्धा तुरंत अपने वाई-फाई चालू करने में लग गए। सोशल मीडिया पर “फॉल्स फ्लैग” थ्योरी वाले पोस्ट अचानक तेज़ी से बढ़ गए, और सबसे ज़्यादा 6 मई को दिखे, यानी ठीक उसी दिन जब भारत ने जवाबी हमला किया, मानों एयरस्ट्राइक सिर्फ बिल्डिंग्स नहीं, बॉट नेटवर्क और कंटेंट प्लानिंग भी हिला देती है। इन इन्फ्लुएंसर्स ने इतने जोर-शोर से हैशटैग चलाने शुरू किए जैसे उनकी सैलरी उसी पर टिकी हो (और शायद हो भी!)।
भारत के चीफ़ ऑफ डिफेंस स्टाफ, जनरल अनिल चौहान ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना का लगभग 15% समय केवल फर्जी खबरों का खंडन करने में लगता था। उनके मुताबिक: “फेक न्यूज़ से निपटना एक लगातार चलने वाला काम बन गया था। हमने हर बयान बहुत सोच-समझकर दिया, क्योंकि किसी बड़ी कार्रवाई के समय झूठी बातें लोगों की सोच को भटका सकती हैं।”[7]
जब देश की सुरक्षा के समय में आपको ऐसे मीम्स का भी खंडन करना पड़े जिनकी प्रोफाइल फोटो कभी चे ग्वेरा की होती है तो कभी किसी ऐनिमे किरदार की, तो समझिए दुश्मन की हालत गंभीर है। हालांकि पाकिस्तान चाहे जितना भी झूठ फैला ले, उससे वो जंग नहीं जीत सकता।
पाकिस्तान एक खतरनाक ढलान पर
सोशल मीडिया के शुरुआती दौर में लोग एक-दूसरे की अहमियत उनके फॉलोअर्स की गिनती से नापते थे। इसी को लेकर एक अख़बार में एक कार्टून आया था — एक आदमी की अंतिम यात्रा में सिर्फ़ तीन-चार लोग आए, और एक मेहमान कहता है, “इसके तो दो हजार फेसबुक फ्रेंड थे, मुझे तो ज़्यादा भीड़ की उम्मीद थी।”[8]
जाहिर है कि ऑनलाइन नंबरों से असली ताकत का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता। ठीक वैसे ही, पाकिस्तान चाहे जितना भी झूठा प्रचार कर ले, असली जंग में उसकी हार पक्की है। जब भारत ने पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों, 10 मिलिट्री बेस और चीन से मिले एयर डिफेंस सिस्टम पर हमला किया, तो पाकिस्तान के पास कोई जवाब नहीं था। भारत ने एक साफ और सटीक योजना के तहत इतना बड़ा हमला किया कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार भी खतरे में आ गए, वही हथियार जिन्हें वो सालों से ढाल की तरह इस्तेमाल करता आया था। जैसे-जैसे पाकिस्तान की रक्षा ढांचे टूटते गए और नुकसान बढ़ता गया, उसे आखिरकार सीज़फायर की गुहार लगानी पड़ी — पहले वॉशिंगटन से और फिर दिल्ली से।[9]
इतिहास गवाह है कि भारत ने जब जब पाकिस्तान पर हमला दिया है, पाकिस्तान की सीमा में और गहराई तक वार किया है:
- 2016 में उरी हमले के बाद PoK में सर्जिकल स्ट्राइक हुई।
- 2019 में बालाकोट (खैबर-पख्तूनख्वा) में एयरस्ट्राइक की गई।
- 2025 में भारत ने पूरे पाकिस्तान में सटीक हमले किए।
पाकिस्तान को अपना अगला कदम ध्यान से रखना होगा, क्योंकि अब उसके पास न तो छिपने की जगह बची है और न ही पीछे हटने का मौका। अगर अगली बार हमला हुआ, तो सिर्फ सेना ही नहीं, उसकी पूरी अर्थव्यवस्था भी चरमरा सकती है।
भारत पर झूठे प्रचार का असर
भारत इस “सूचना की लड़ाई” को हल्के में नहीं ले सकता। आज जब लोग न्यूज़ चैनल से ज़्यादा सोशल मीडिया पर भरोसा करने लगे हैं, तो झूठा प्रचार उनकी सोच पर असर डाल सकता है। यह सिर्फ बेकार मीम्स और अजीब पॉडकास्ट की बात नहीं है, फेक न्यूज़ कई अलग-अलग तरीकों से नुकसान पहुँचा सकती है। मान लीजिए, ब्रसेल्स में बैठा कोई अधिकारी लाहौर के किसी बॉट का बनाया मीम देखकर भारत के साथ व्यापार डील टाल दे, या फ्रांस का कोई बड़ा इन्वेस्टर मुंबई में निवेश करने से पीछे हट जाए, तो ये सीधा हमला न सही पर एक छुपा हुआ रणनीतिक वार ही है। ।
NCRI की रिपोर्ट के अनुसार, “जब विदेशी दखल, सांप्रदायिक बातें और ऑनलाइन झूठ आपस में मिल जाते हैं, तो वो भारत की आंतरिक एकता के लिए बड़ा खतरा बनते हैं। 2022 का लेस्टर दंगा दिखाता है कि प्रवासी समुदाय को झूठे नैरेटिव के ज़रिए भड़काना कितना आसान है — इससे असली दंगे, हिंसा और सामाजिक सौहार्द्र को नुकसान हो सकता है।”
अब पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा, जिसे कभी सिर्फ ऑनलाइन ट्रोलिंग समझा जाता था, वो अब एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय खतरा बनता जा रहा है। AI टूल्स जैसे-जैसे तेज़ और स्मार्ट हो रहे हैं, वैसे-वैसे सच और झूठ में फर्क करना और मुश्किल होता जा रहा है — और समाज उन डिजिटल चेहरों और कीबोर्ड सिपाहियों के हाथों अस्थिर हो सकता है जो दूर किसी कमरे में बैठे पूरी दुनिया में अराजकता फैला रहे हैं।
इस खेल को उसके असली नाम से बुलाना चाहिए: नैरेटिव वॉरफेयर। अब पाकिस्तान की सेना सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि इन्फ्लुएंसर्स और AI प्रोग्रामर्स की मदद से ये लड़ाई लड़ रही है। और सबसे अजीब बात ये है कि जो देश सालों से आतंकवादियों को पनाह देता रहा है,
वही आज भारत पर उंगली उठाकर कहता है, “भारत ने खुद पर हमला किया!”[10]
अगर विडंबना को भी हथियार में बदला जा सकता, तो शायद पाकिस्तान के पास एक वाकई में वर्ल्ड-क्लास हथियार होता।
निष्कर्ष: डिजिटल जिहाद बनाम इंटरनेट सर्कस
अब पाकिस्तान की सेना अकेले नहीं लड़ रही, उसके साथ हैं AI बॉट्स, इंटरनेट वाले खुद-घोषित “धर्मगुरु,” और ऐसे इन्फ्लुएंसर जो खुद को “MAGA मार्क्सवादी” कहते हैं। LOC से लेकर ट्विटर तक पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ अपनी ये नई जंग शुरु कर दी है। और इनके हथियार क्या हैं? नकली मीम्स, तोड़े-मरोड़े हुए तथ्यों की जुगाली, और ऐसे लोग जिनकी सबसे बड़ी क्वालिफिकेशन है — वायरल होना।
पर सबसे ज़बरदस्त तंज ये है कि भारत की छवि बिगाड़ने के चक्कर में पाकिस्तान खुद मज़ाक बन गया है। वो इतना नीचे गिर चुका है कि अब अपनी गरिमा भी एक ऐसे पॉडकास्ट को सौंप चुका है जो YouTube, Instagram और Twitch से बैन हो चुका है। आख़िरकार, पाकिस्तान की ये पूरी “सूचना जंग” भारत को तो नहीं हिला पाई, लेकिन ये ज़रूर साबित कर दिया कि एक परमाणु ताक़त रखने वाला देश भी चाहे तो खुद को सिर्फ़ एक मीम बनाने वाली फैक्ट्री में बदल सकता है।
स्पष्टीकरण: इस लेख को लिखते वक्त किसी बॉट को नुकसान नहीं पहुँचाया गया।
हाँ, कुछ को ब्लॉक जरूर किया गया।
संदर्भ सूची
[1] Rakesh Krishnan Simha, From Paris to Pahalgam: Why the World Must Unite to Defeat Radical Islam; https://stophindudvesha.org/from-paris-to-pahalgam-why-the-world-must-unite-to-defeat-radical-islam/
[2] NCRI, From State Actors to Western Influencers: The Transnational Surge of “False Flag” Disinformation After Terror Attack in India; https://networkcontagion.us/wp-content/uploads/Inside-a-Pakistani-network-promoting-false-flag-conspiracies-about-Pahalgam-terrorist-attack.pdf
[3] The Jewish Vhronicle, Who is Jackson Hinkle? Twitter’s most viral misinformation spreader and anti-Israel activist; https://www.thejc.com/news/world/who-is-jackson-hinkle-twitters-most-viral-misinformation-spreader-and-anti-israel-activist-m9kzki7y
[4] New York Post, Russia, Pakistan and Houthi rebels all using the same US influencer — Jackson Hinkle — to spread misinformation to his 3 million followers; https://nypost.com/2025/05/19/world-news/us-social-media-influencer-spreads-anti-western-propaganda/
[5] Jai G Bansal, Pakistan Joins UN Counter-Terrorism Committee: A Diplomatic Farce Drenched in Blood; https://stophindudvesha.org/pakistan-joins-un-counter-terrorism-committee-a-diplomatic-farce-drenched-in-blood/
[6] The Sunday Guardian, Anti-Hindu hate flies under the radar in the UK; https://sundayguardianlive.com/news/anti-hindu-hate-flies-under-the-radar-in-the-uk
[7] ‘First Post, Countering fake narratives took Army’s 15% of time during Op Sindoor’: CDS Anil Chauhan; https://www.firstpost.com/india/operation-sindoor-disinformation-campaign-cds-anil-chauhan-13893317.html
[8] X Tweet, He had over 2000 Facebook friends, I was expecting a bigger turnout; https://ifunny.co/picture/he-had-over-2000-facebook-friends-i-was-expecting-a-bEl9AoXgA
[9] YouTube, Pak Caught Red-handed: ‘Their DGMO Called Us Fearing Retaliation’ | Indian Army’s Big Reveal; https://www.youtube.com/watch?v=h3uyWba6wsw
[10] YouTube, Pakistan lost ALL 4 wars against India : Mr. Najam Sethi; https://www.youtube.com/watch?v=ybioqLp7EVo
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