पक्षपाती सेकुलरिज़्म: न्यायपालिका में बराबरी पाने का हिंदू संघर्ष
- न्यायपालिका पर भरोसा उसकी निष्पक्षता और आस्था के सम्मान पर टिका है, लेकिन हिंदू समाज को हाल के वर्षों में पक्षपात और उपेक्षा का अनुभव हुआ है।
- खजुराहो जवरी मंदिर में टूटी विष्णु मूर्ति की पुनर्स्थापना याचिका को अदालत ने “पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन” कहकर खारिज किया और की गई टिप्पणी से आस्था का अपमान महसूस हुआ।
- संविधान अनुच्छेद 14 और 25 सभी को समान अधिकार देता है, पर व्यवहार में हिंदू संस्थाओं पर अधिक नियंत्रण और अल्पसंख्यक संस्थाओं को अधिक स्वतंत्रता दिखती है।
- कई न्यायिक टिप्पणियाँ और फैसले हिंदू भावनाओं को हल्का साबित करते हैं, जबकि अन्य समुदायों की शिकायतें तुरंत गंभीरता से ली जाती हैं।
- सच्चा धर्मनिरपेक्ष संतुलन तभी संभव है जब सभी धर्मों के लिए समान संरक्षण, समयबद्ध सुनवाई, और पारदर्शी न्यायिक प्रक्रियाएँ सुनिश्चित हों।
Parth Ojas
Parth Ojas is a public intellectual and writer who examines the intersections of law, history, and culture, challenging readers to rethink justice, identity, and India’s civilizational journey.
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