फराह खान की होली पर टिप्पणी: बॉलीवुड की ‘छपरी’ संस्कृति का असली चेहरा

जब बॉलीवुड के तथाकथित अभिजात्य वर्ग होली मनाने वालों को ‘छपरी’ या असभ्य कहता है, तो यह भूल जाता है कि उनकी खुद की इंडस्ट्री भद्दे व्यवहार और अनियंत्रित आचरण से भरी हुई है। विडंबना यह है कि इनके अपने रिश्तेदार व अन्य बॉलीवुड हस्तियाँ उस कसौटी पर नहीं कसी जातीं, जिस पर वे आम हिंदुओं को परखते हैं।
  • फराह खान ने होली को ‘छपरी’ (असभ्य) लोगों का त्योहार बताया, जिससे उनके इस बेवजह बयान पर भारी विरोध हुआ।
  • बॉलीवुड कभी होली को भव्य पार्टियों के साथ मनाता था, लेकिन अब हिंदू त्योहारों के प्रति इसका रवैया नकारात्मक हो गया है।
  • इंडस्ट्री का बदलता नजरिया वैचारिक बदलावों और बाहरी प्रभावों से जुड़ा है, जिससे यह हिंदू परंपराओं से दूर होती जा रही है।
  • फराह खान अपने पति, भाई और पूरे बॉलीवुड समुदाय के दुराचार पर चुप रहती हैं, जिससे इंडस्ट्री की दोहरी मानसिकता और चयनात्मक आक्रोश उजागर होता है।
  • माफी मांगने के बजाय, बॉलीवुड आलोचना से बचने की कोशिश करता है, जिससे सांस्कृतिक त्योहारों के प्रति उसकी पूर्वाग्रही सोच पर सवाल उठते हैं।

जब कहा जाता है कि “स्वच्छता पवित्रता के समान होती है,” तो यह कहावत केवल शारीरिक स्वच्छता तक सीमित नहीं, बल्कि मानसिक शुद्धता की ओर भी संकेत करती है। यानी सभी सामाजिक विषयों पर निष्पक्ष, स्वच्छ, और पूर्वाग्रह रहित सोच को भी दिव्यता या पवित्रता की श्रेणी में रखा जा सकता है। दूसरी ओर, जानबूझकर पक्षपातपूर्ण, कटु या असत्य विचार और वक्तव्य हमेशा अपवित्र और निंदनीय माने जाएंगे, चाहे उन्हें बाद में लंबी सफाई देकर सही ठहराने की कितनी भी कोशिश की जाए। बॉलीवुड की मशहूर कोरियोग्राफर और निर्देशक फराह खान का हालिया बयान इसका ताज़ा उदाहरण है।

अपने कुकिंग शो सेलिब्रिटी मास्टरशेफ 2025 के नवीनतम एपिसोड में फराह खान कैमरे की ओर देखकर कहती हैं कि होली ‘छपरी’ (असभ्य) लोगों का पसंदीदा त्योहार है। उन्होंने कहा, “छपरी लोगों का फेवरेट फेस्टिवल होता है होली।” फराह खान का यह बयान बिना किसी उकसावे के आया; यह न तो उनके व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित था और न ही किसी भी तरह से कुकिंग शो के संदर्भ में प्रासंगिक था। गौर करने वाली बात यह भी है कि फराह खान की शादी एक हिंदू से हुई है और वह आमतौर पर खुद को अपने दर्शकों के सामने सेक्युलर छवि में पेश करती हैं।

तो फिर उन्होंने हिंदुओं के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक पर इतना आपत्तिजनक बयान क्यों दिया?

असल में, इसका जवाब समाजशास्त्र की तुलना में मनोविज्ञान में अधिक छिपा हुआ है। सच्चाई यह है कि बॉलीवुड जिस उच्च संस्कृति का दिखावा करता है, वह वास्तव में अपने भीतर की असभ्यता, अशिष्टता और अनगढ़ता को छिपाने का मात्र एक प्रयास है।

एक समय था जब बॉलीवुड में होली बड़े पैमाने पर मनाई जाती थी

भूतकाल में बॉलीवुड में होली को कभी भी असभ्य लोगों का त्योहार नहीं माना जाता था। बल्कि, पुरानी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री अपनी भव्य और शोरगुल से भरी होली पार्टियों के लिए मशहूर थी। हर प्रतिष्ठित अखबार और पत्रिका में इन बॉलीवुड होली पार्टियों की तस्वीरें और खास पलों को प्रकाशित किया जाता था। आज की भाषा में, ये होली उत्सव केवल त्योहार नहीं, बल्कि नेटवर्किंग इवेंट बन चुके थे, जहां यह तय होता था कि किस सितारे की प्रतिष्ठा कितनी है और उन्हें किन बड़ी होली पार्टियों में आमंत्रित किया गया।

बॉलीवुड में सबसे बड़ी होली पार्टी (दिवंगत) राज कपूर द्वारा आर.के. स्टूडियो, मुंबई में आयोजित की जाती थी। यह होली पार्टी हर किसी के लिए एक यादगार आयोजन होता था। इस पार्टी का क्रेज इतना अधिक था कि लोग केवल इसकी झलक पाने के लिए बैरिकेड्स और छतों पर चढ़ जाया करते थे। राज कपूर हर साल यह पार्टी आयोजित करते थे, और बॉलीवुड के तमाम बड़े सितारे इसमें शामिल होते थे। इनमें अमिताभ बच्चन, प्रेम नाथ, निरूपा रॉय, राजेंद्र कुमार, नरगिस, शक्ति कपूर और शम्मी कपूर जैसे दिग्गज कलाकार नियमित रूप से शिरकत करते थे। इस दौरान बॉलीवुड के गीतों पर नाच-गाना होता था, और पारंपरिक गुलाल व भांग का माहौल पूरी तरह रंगीन बना देता था।[1]

लेकिन जैसे-जैसे बॉलीवुड की सत्ता संरचना राज कपूर से हटकर दूसरों की ओर बढ़ी, कई नए दावेदार सबसे बड़ी होली पार्टी के आयोजक बनने के लिए आगे आए। निर्देशक सुभाष घई, जिन्हें राज कपूर के बाद बॉलीवुड का नया शोमैन माना जाता था, ने भी अपने करियर के चरम पर रहते हुए बड़े होली समारोह आयोजित किए। यहां भी बॉलीवुड के दिग्गज सितारे बड़ी संख्या में शामिल होते थे। अमिताभ बच्चन ने भी कुछ वर्षों तक इस प्रतिष्ठित होली नेटवर्किंग इवेंट की मेजबानी की थी।

सत्तर और अस्सी के दशक में बॉलीवुड की होली पार्टियों की एक खास बात यह थी कि यह पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष माहौल में मनाई जाती थीं। इन बड़ी होली पार्टियों में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और सिख सभी बिना किसी जात-पात के भेदभाव के शामिल होते थे। बॉलीवुड के अंदर आयोजित प्रमुख होली आयोजनों में से एक प्रसिद्ध शायर और गीतकार कैफ़ी आज़मी द्वारा आयोजित किया जाता था, जिसकी परंपरा उनकी बेटी शबाना आज़मी और उनके पति जावेद अख्तर (सलीम-जावेद की मशहूर जोड़ी में से एक) ने आगे बढ़ाई। इसी तरह, जब शाहरुख़ ख़ान बॉलीवुड के शीर्ष सितारे बने, तब उन्होंने भी कुछ होली पार्टियों का आयोजन किया, जिसमें अगली पीढ़ी के बॉलीवुड सितारों को एक मंच दिया जाता था।

कुल मिलाकर, बॉलीवुड में होली सिर्फ़ एक त्योहार नहीं था, बल्कि शोबिज़ (Showbiz) की ऊंची सोसाइटी के बीच मेलजोल और आपसी संबंधों को मजबूत करने का एक अवसर था। इन पार्टियों की तस्वीरें और वीडियो सालों तक गॉसिप कॉलम्स में छाए रहते थे।

यहाँ एक सवाल उठता है। फराह खान, जो खुद बॉलीवुड के परिवार से आती हैं और खुले तौर पर जावेद अख्तर के परिवार से अपने संबंधों का प्रदर्शन करती हैं, आखिर उन्होंने बॉलीवुड के सबसे बड़े त्योहार के प्रति इतनी नफरत भरी टिप्पणी क्यों की? क्या वह यह इशारा कर रही हैं कि उनका अपना पूरा परिवार ही ‘छपरी’ (असभ्य) है? या फिर वह यह कह रही हैं कि शाहरुख़ ख़ान, जो उनकी ज्यादातर फिल्मों में मुख्य अभिनेता होते हैं, छपरी हैं?

बॉलीवुड – एक हास्यास्पद रंगमंच

होली केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि इसका वैज्ञानिक आधार भी इसे हिंदू त्योहारों में एक विशिष्ट स्थान देता है। यह त्योहार आमतौर पर सर्दी से गर्मी में बदलाव के समय आता है, जब भारतीय उपमहाद्वीप में मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इस मौसम परिवर्तन से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है, जिससे वायरल संक्रमण, एलर्जी और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। प्राचीन हिंदू ऋषियों ने इस समस्या का एक प्राकृतिक समाधान निकाला— होली उत्सव।

प्राकृतिक रंगों, जैसे हल्दी और नीम, से खेलना सिर्फ़ मनोरंजन नहीं था, बल्कि यह एक प्रभावी उपाय था जो शरीर को संक्रमणों से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करता था। साथ ही, जब पूरे गाँव और समुदाय एक साथ होली मनाते थे, तो यह पुराने झगड़ों को भुलाने और आपसी संबंध सुधारने का भी अवसर बन जाता था।

स्वाभाविक रूप से, बॉलीवुड ने इस रंगीन उत्सव को फिल्मों में प्रस्तुत करने में देर नहीं लगाई, क्योंकि यह एक आइकॉनिक सॉन्ग ब्रेक के लिए एकदम उपयुक्त त्योहार था। होली की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि यह बॉलीवुड के प्रभावशाली वर्ग के लिए शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक बन गई। लेकिन धीरे-धीरे बॉलीवुड पर बाहरी प्रभाव बढ़ता गया, खासतौर पर पाकिस्तान के अंडरवर्ल्ड डॉनों के प्रभाव में आने के बाद, और उसी के साथ होली, बॉलीवुड और बॉलीवुड में होली का स्वरूप भी बदल गया।

अगर पहले के दौर में फराह खान ने होली पर इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी की होती, तो उन्हें बॉलीवुड में ही कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ता। लेकिन आज, उन्हें उनके लेफ्ट-लिबरल गैंग और हिंदू-विरोधी गुटों द्वारा खुला समर्थन मिल रहा है, जो अब बॉलीवुड के कथित अभिजात्य वर्ग का हिस्सा बन चुके हैं।

सवाल उठता है कि क्या फराह खान वास्तव में समाज में ‘असभ्यता’ पर बोलने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं? जो कोई भी उनके विभिन्न टेलीविज़न शोज़ देखता है, वह आसानी से समझ सकता है कि उनकी मुंबईया भाषा और असभ्य व्यवहार उन्हें ही ‘छपरी’ की श्रेणी में ला देता है। फिर भी, अगर वह संस्कारी-असंस्कारी की बहस में ज्ञान बांटना चाहती हैं, तो उनकी अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि पर भी नज़र डालना जरूरी हो जाता है।

फराह खान के पति शिरीष कुंदर का नाम सबसे अधिक चर्चा में तब आया जब 2012 में एक बॉलीवुड पार्टी में शाहरुख़ खान ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। नशे में धुत्त शिरीष कुंदर की शाहरुख़ खान से झड़प हो गई, जिसके बाद शाहरुख़ ने उन्हें पीट दिया। स्वाभाविक रूप से, फराह खान और उनकी टीम ने शाहरुख़ खान के खिलाफ मीडिया में हंगामा खड़ा कर दिया।[2] लेकिन क्या इससे फराह और शाहरुख़ की पेशेवर साझेदारी खत्म हो गई? जी नहीं…

अत्यधिक ‘संस्कारी’ फराह खान को जल्दी समझ में आ गया कि उनका करियर शाहरुख़ खान के बिना अधूरा है। उन्होंने अपनी नाराजगी भुलाकर दोबारा शाहरुख़ के साथ फिल्म बनाई और एक और हिट देने के लिए उन्हीं के खेमे में लौट आईं।

लेकिन इनकी संस्कारिता का स्तर और भी गिरा हुआ पाया जब फराह खान के भाई साजिद खान का नाम यौन शोषण के कई मामलों में सामने आया। बॉलीवुड की कई अभिनेत्रियों, मॉडल्स और पत्रकारों ने साजिद खान पर अश्लील हरकतें और अनुचित प्रस्ताव देने का आरोप लगाया।[3] उनकी हरकतों की गंभीरता इसी से समझी जा सकती है कि करीब नौ महिलाओं ने उनके खिलाफ खुलकर आवाज़ उठाई।[4] हालांकि, असली संख्या कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई पीड़ित करियर और बदनामी के डर से आज भी चुप हैं।

स्थिति इतनी खराब हो गई कि ‘फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE)’ को साजिद खान पर प्रतिबंध लगाना पड़ा और उन्हें कई फिल्म व टेलीविज़न प्रोजेक्ट्स से निकाल दिया गया।[5]

तो क्या फराह खान ने अपने भाई को ‘छपरी’ कहा? या फिर उनकी ‘संस्कारी’ परिभाषा केवल हिंदू त्योहारों तक सीमित है?

आइक और अहम सवाल: क्या फराह खान में इतनी हिम्मत है कि वह ईद या अन्य इस्लामी त्योहारों को भी ‘छपरी लोगों का त्योहार’ कह सकें?

‘छपरी’ का तमगा किसे?

फराह खान ने अपने भाई और पति के छपरी स्वभाव पर कभी कोई टिप्पणी नहीं की, तो होली मनाने वालों के लिए क्यों? हाँ, कोई यह तर्क दे सकता है कि वह पेशेवर रूप से अपने परिवार के सदस्यों के साथ हर प्रोजेक्ट में काम नहीं करतीं और उनके विवादित आचरण के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या फराह खान सच में यह सुनिश्चित करती हैं कि उनके द्वारा नापसंद किए गए ‘छपरी’ लोग उनकी फिल्मों का हिस्सा न बनें?

अगर इस पर गहराई से विचार करें, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि फराह खान का पूरा करियर जिस सुपरस्टार पर टिका है, वह कौन है? जी हाँ, शाहरुख़ ख़ान, जिन्होंने फराह खान की चार में से तीन सुपरहिट फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई। (वैसे, उनकी इकलौती फिल्म जिसमें शाहरुख़ खान नहीं थे, वह बुरी तरह फ्लॉप हो गई थी।)

अब सवाल यह उठता है कि क्या फराह खान अपने प्रिय अभिनेता शाहरुख़ ख़ान पर वही कठोर ‘संस्कारी’ मानक लागू कर सकती हैं, जिनसे वह होली मनाने वालों को जज करती हैं? यही शाहरुख़ खान एक बार एक टेलीविज़न इंटरव्यू में सपाट चेहरे से कह चुके हैं कि उनका सपना दुनिया का सबसे बड़ा पॉर्न स्टार बनने का है।[6] हाँ, आपने सही पढ़ा, और अगर यह उनके ‘संस्कार’ का सही आकलन करने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो उनके एक बॉलीवुड अवॉर्ड शो की मेजबानी के दौरान कही गई बात पर भी ध्यान देना चाहिए।

इस शो में उन्होंने अपने सह-होस्ट रणबीर कपूर पर मज़ाक उड़ाते हुए कहा था कि वह ‘बदकिस्मत’ हैं क्योंकि वह अपनी बहन करीना कपूर को नहीं चाह सकते।[7] मतलब, उनके अनुसार ‘बदकिस्मती’ का मतलब नैतिक मूल्यों का पतन नहीं, बल्कि अपनी बहन पर आकर्षित होने का ‘मौका चूक जाना’ था।

अब सवाल यह उठता है – क्या फराह खान कभी इस स्तर पर जाकर शाहरुख़ ख़ान को ‘छपरी’ कह सकती हैं? या फिर उनकी आलोचना सिर्फ उनके हिंदू दर्शकों के लिए ही आरक्षित है, जिन्होंने उनकी हल्की-फुल्की, बेसिर-पैर की कॉमेडी फिल्मों को सुपरहिट बनाया है?

छपरीबचाव: असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश

ऐसे नाजुक हालात में समझदारी इसी में होती कि गलत शब्दों के चयन के लिए क्षमा याचना की जाती और आगे बढ़ा जाता। लेकिन बॉलीवुड की ‘संस्कारी’ परिभाषा के अनुसार, गलतियों को स्वीकार करने के बजाय अपने पीआर नेटवर्क और सोशल मीडिया पर प्रायोजित समर्थकों की मदद से जनता के आक्रोश को दबाना ज्यादा आसान होता है। फराह खान के समर्थकों ने भी यही किया। उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि उनका विवादित बयान धर्म के खिलाफ नहीं था, बल्कि महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़ा था।

कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स ने फराह खान के बयान का बचाव करते हुए इसे धार्मिक नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया। एक ने दावा किया कि वह त्योहार या धर्म की निंदा नहीं कर रही थीं, बल्कि उन पुरुषों के बारे में बोल रही थीं जो होली का बहाना बनाकर महिलाओं का शोषण करते हैं। वहीं, एक ने इसे हिंदू-मुस्लिम विवाद से अलग बताते हुए कहा कि वह एक महिला और हिंदू होने के नाते फराह का समर्थन करती हैं, क्योंकि हर होली पर किसी न किसी महिला को यह सब झेलना पड़ता है, इसलिए इसे महिला सुरक्षा के नजरिए से देखा जाना चाहिए। एक और ने सफाई देते हुए कहा कि फराह खान गलत नहीं कह रही हैं और हर चीज में धर्म को घसीटने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह नहीं कहा कि होली ‘छपरी’ लोगों का त्योहार है, बल्कि भारत में जाति और धर्म की परवाह किए बिना कई पुरुष होली का बहाना बनाकर महिलाओं को छूने और छेड़छाड़ करने की कोशिश करते हैं।[8]

लेकिन बॉलीवुड की पीआर एजेंसियों को यह समझना चाहिए कि होली को ‘छपरी’ उत्सव के रूप में दिखाने का सबसे बड़ा दोष खुद बॉलीवुड पर ही जाता है। यही इंडस्ट्री होली को फिल्मों में भद्दे दृश्यों और जबरदस्ती के गानों के जरिए खराब तरीके से चित्रित करती रही है। और अब, कोई भी अपनी आपत्तिजनक टिप्पणी को ‘जेंडर पॉलिटिक्स’ के नाम पर छुपाने की कोशिश नहीं कर सकता।

अगर फराह खान अपने करियर को बचाना चाहती हैं, तो उन्हें अपने हिंदू दर्शकों से माफी मांगनी चाहिए, जिन्हें उन्होंने इतनी ठेस पहुंचाई है। हालांकि, इसकी संभावना बहुत कम है। इसके बजाय, ज्यादा संभावना इस बात की है कि फराह खान जल्द ही किसी हाई-प्रोफाइल होली नेटवर्किंग इवेंट में नजर आएंगी, जहां वह उन्हीं ‘छपरी’ लोगों के साथ पूरे जोश से त्योहार मनाती दिखेंगी।

और हां, इन बॉलीवुड हस्तियों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि होली का आयोजन भारत में हो रहा है या पाकिस्तान में ‘छपरी’ आयोजकों द्वारा— जैसा कि अभिनेता ऋतिक रोशन इस बार की होली में करने वाले हैं।[9]

यही तो इनकी ‘संस्कारीपन’ की सबसे बड़ी पहचान है— या फिर, इसकी पूरी तरह से अनुपस्थिति की!

संदर्भ सूची 

[1] Sundaresan, Satish. 2023. “Holi Bollywood! Have Bollywood Holi parties gone from sizzle to fizzle over the years?” OTTplay. https://www.ottplay.com/news/holi-bollywood-have-bollywood-holi-parties-gone-from-sizzle-to-fizzle-over-the-years/20984b6e2a185

[2] TOI. 2012. “Why Shah Rukh Khan slapped Farah Khan’s husband Shirish Kunder remains unclear | Hindi Movie News – The Times of India.” Times of India. https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/why-shah-rukh-khan-slapped-farah-khans-husband-shirish-kunder-remains-unclear/articleshow/11692530.cms

[3] Eminent Intellectual. 2025. “Farah Khan calls Holi “Chhapri” festival. Her Chhapri brother is a serial molester.” Twitter/X. https://x.com/total_woke_/status/1897931156164637171

[4] CNBC-TV18. 2022. “Sajid Khan: Top controversies of the filmmaker.” CNBC TV18. https://www.cnbctv18.com/entertainment/sajid-khan-top-controversies-of-filmmaker-in-bollywood-mumbai-15229171.htm

[5] Pandey, Geeta. 2022. “’Remove Sajid Khan’: Growing calls in India to drop Bollywood director from Bigg Boss.” BBC. https://www.bbc.com/news/world-asia-india-63128128

[6] Gems of Bollywood. 2025. “Urduwood’s nakli Pathaan once revealed his ultimate dream—becoming ‘biggest p*rn star in the world.’” Twitter/X. https://x.com/GemsOfBollywood/status/1897248467585487070

[7] Ibid

[8] Kaur, Arshdeep. 2025. “’Chhapri logo ka favourite…’: Farah Khan faces backlash for comment on Holi; netizens say ‘Look who’s talking’ | Today News.” Mint. https://www.livemint.com/news/trends/chhapri-logo-ka-favourite-farah-khan-faces-backlash-for-comment-on-holi-netizens-say-look-who-s-talking-11740039452282.html

[9] No Conversion. 2025. “Question to Hrithik Roshan @iHrithik ,you could not find a single HINDU promoter in USA to celebrate Holi,,, a Pakistani group from Dallas is all you could find? Shameful.” Twitter/X. https://x.com/noconversion/status/1896276133962035356

Nitin Sawant
Nitin Sawant
Nitin Sawant usually works as a Bollywood film marketer, online publicist for a few playback singers, script writer and lyrics writer. He was a full-time marketing coordinator for 'Goopi Gawaiyya Bagha Bajaiyya' and works with new film Producers to package their content for the emerging online media space. In between, he creates content for various publications including 'Karadi Tales' and also has a bestseller novella to his name.
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