अजमेर और ब्यावर का लक्षित जिहाद: हिंदू लड़कियों को फंसाने से कैसे रोका जाए
- इन घटनाओं में मुस्लिम गिरोहों द्वारा हजारों नाबालिग हिंदू लड़कियों को योजनाबद्ध तरीके से फंसाया गया, उनके साथ बलात्कार किया गया, ब्लैकमेल किया गया और जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया। यह एक गहरी साजिश और लक्षित शोषण के खतरनाक पैटर्न को उजागर करता है।
- अधिकारियों, मीडिया और राजनीतिक नेताओं ने इस्लामोफोबिया के आरोपों के डर से इन अपराधों को दबाने की कोशिश की, जिससे न्याय में देरी हुई और पीड़ितों को निरंतर पीड़ा झेलनी पड़ी।
- अपराधियों ने अपने कृत्यों को कट्टरपंथी धार्मिक मान्यताओं से उचित ठहराया, तथा गैर–मुस्लिम लड़कियों के बलात्कार और जबरन धर्मांतरण को धार्मिक कर्तव्य या जनसांख्यिकीय युद्ध के रूप में देखा।
- इन अपराधों में सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क बनाना, भावनात्मक रूप से हेरफेर करना, अश्लील तस्वीरों से ब्लैकमेल करना और जबरन धर्म परिवर्तन कराना शामिल है। यह हिंदू लड़कियों को निशाना बनाने की एक संगठित और सुनियोजित रणनीति को दर्शाता है।
- इस लेख में हिंदू परिवारों से आग्रह किया गया है कि वे इन खतरों के प्रति सतर्क रहें, अपने बच्चों के सामाजिक संबंधों पर नजर रखें और किसी भी कट्टरपंथी प्रभाव को रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।
पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रूमिंग गिरोहों द्वारा कम उम्र के ब्रिटिश बच्चों को शिकार बनाने से दशकों पहले, भारत ने अजमेर में एक भयावह घटना देखी थी, जिसमें एक हज़ार से ज़्यादा कम उम्र की हिंदू स्कूली लड़कियों के साथ बलात्कार किया गया, उनकी तस्वीरें खींची गईं और उन्हें मुसलमानों द्वारा ब्लैकमेल किया गया ।[1] ये दरिंदे अजमेर शरीफ़ दरगाह चलाने वाले परिवार से थे, जहाँ लाखों बेवकूफ हिंदू तीर्थयात्रा के लिए जाते हैं। और, ब्रिटेन की तरह ही, भारतीय मीडिया, पुलिस और राजनेताओं ने इस्लामोफ़ोबिक के आरोप के डर से इस त्रासदी को दबा दिया। फिर न्याय मिल तो बहुत ही कम और बहुत देर से। 1992 में बलात्कार का शिकार हुए बच्चे 2000 के दशक के अंत में दादी-नानी बनकर अदालतों के चक्कर लगा रहे थे।
अजमेर के घाव अभी भरे भी नहीं थे कि फरवरी 2025 में खबर आई कि, एक बार फिर, ब्यावर में – जो अजमेर से सिर्फ एक घंटे की दूरी पर है – सैकड़ों नाबालिग हिंदू लड़कियों के साथ बलात्कार किया गया, उन्हें ब्लैकमेल किया गया और उनका इस्लामिकरण कर दिया गया।
इससे पहले कि कोई कहे कि यह सिर्फ़ एक और अपराध था और हिंदू इसमें धर्म को घसीट रहे हैं, यहाँ एक तथ्य जानना आवश्यक है: ब्यावर या अजमेर में बलात्कार और ब्लैकमेल की गई लड़कियों में से कोई भी मुस्लिम नहीं थी। सच तो यह है कि भारत में मुस्लिम बलात्कारी जानबूझकर हिंदू लड़कियों को निशाना बनाते हैं। उनका मानना है कि काफिर लड़कियों का बलात्कार करना एक धर्मनिष्ठ मुसलमान का कर्तव्य है। वे इस्लामिक स्टेट की दबीक पत्रिका जैसे स्रोतों से प्रेरणा लेते हैं, जो घोषणा करती है: “कुफ़्फ़ार [अविश्वासियों] के परिवारों को गुलाम बनाना और उनकी महिलाओं को रखैल के रूप में रखना शरिया [इस्लामी कानून] का एक पुराना स्थापित पहलू है, जिसे अगर कोई नकारता है या उसका मज़ाक उड़ाता है, तो वह कुरान की आयतों और पैगंबर की कहानियों का नकार रहा है या उनका मज़ाक उड़ा रहा है ।”[2]
कट्टरपंथी मुसलमानों के लिए, गैर-इस्लामिक देश में गैर-मुसलमानों के बीच रहना एक तरह से युद्ध की स्थिति में रहना है, और बलात्कार युद्ध का एक वैध हथियार है। इस्लामिक स्टेट – जो कुरान की शब्दानुसार सटीक व्याख्या का पालन करता है, ने निष्कर्ष निकाला है कि चूंकि मोहम्मद के समय में बलात्कार एक आम प्रचलित प्रथा थी, इसलिए यह एक पुण्य कार्य है, और इसमें भाग लेना आध्यात्मिक रूप से लाभकारी है ।[3]
इस से भी अधिक चौंका देने वाली बात यह है कि भारत में मुस्लिम गिरोह देश के नए कानूनों से नहीं डर रहे हैं, जिसमें बच्चों के साथ बलात्कार के लिए मौत की सज़ा का प्रावधान है। यह कट्टरपंथी मुसलमानों के बीच इस गहरी मान्यता की ओर इशारा करता है कि अगर इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद ने छह साल की बच्ची से शादी की और जब वह नौ साल की हुई तो उन्होंने उसके साथ संभोग कर लिया, तो उनके अनुयायियों के लिए बच्चों के साथ यौन संबंध बनाना पूरी तरह से सही है।
ब्यावर 2025: सामूहिक जालसाजी
पश्चिमी भारत के एक छोटे से कस्बे ब्यावर से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। फरवरी 2025 में, स्थानीय पुलिस ने अनपढ़ मुस्लिम युवकों रेहान मोहम्मद (20), सोहेल मंसूरी (19), लुकमान (20), अरमान पठान (19), साहिल कुरैशी (19) और दो नाबालिगों के एक गिरोह का भंडाफोड़ किया, जो हिंदू लड़कियों को फंसा रहे थे, उनका बलात्कार कर रहे थे और उन्हें इस्लाम में परिवर्तन के लिए मजबूर कर रहे थे। ये जाहिल जिहादी हिंदू लड़कियों को नमाज, रोजा और कलमा (इस्लामी विश्वास की घोषणा) पढ़ने के बारे में सिखा रहे थे। इसके अलावा, वे लड़कियों पर बुर्का पहनने, नमाज अदा करने, रोजा (उपवास) रखने का दबाव डाल रहे थे और इस्लाम में धर्म परिवर्तन के लिए उनका ब्रेनवॉश कर रहे थे। सोहेल मंसूरी ने उन लड़कियों में से एक लड़की, जिसका उसने बलात्कार किया था, की कलाई काट दी, जब उसने कलमा पढ़ने में अनिच्छा दिखाई ।[4]
यह मामला तब प्रकाश में आया जब एक नाबालिग लड़की के परिवार ने उसके पास एक चीनी मोबाइल फोन पाया, जिससे पता चला कि वह पुरुषों के एक समूह के साथ बातचीत करती थी। आगे की जांच में पता चला कि आरोपियों ने कई लड़कियों को निशाना बनाया गया था, संपर्क शुरू करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया, उन्हें मोबाइल फोन उपहार में दिए और अंततः उनका यौन शोषण किया। उन्होंने आपत्तिजनक वीडियो भी रिकॉर्ड किए और इनका इस्तेमाल लड़कियों को ब्लैकमेल करने के लिए किया ताकि वे संबंध जारी रख सकें और दूसरी लड़कियों को भर्ती कर सकें।[5]
जांच में नाटकीय मोड़ तब आया जब पूर्व नगर पार्षद हकीम कुरैशी की गिरफ़्तारी हुई। अधिकारियों का मानना है कि उनकी संलिप्तता एक गहरे गठजोड़ की ओर इशारा करती है, जिसमें कई मुस्लिम व्यक्ति शोषण गिरोह में सहयोग कर रहे हैं।
अजमेर 1992: जब संरक्षक ही शिकारी बन गए
1992 में अजमेर में लक्षित सामूहिक बलात्कार के सबसे भयावह मामलों में से एक सामने आया था। अजमेर शरीफ दरगाह – ईरान के सूफी ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (1141-1230 ई.) के खादिम (देखभालकर्ता) फारूक चिश्ती के नेतृत्व में एक मुस्लिम गिरोह द्वारा कई महीनों तक लगभग 1,100 हिंदू लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था।
आगे बढ़ने से पहले हमें सूफियों और ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के बारे में थोड़ा जानना होगा। एमए खान अपनी पुस्तक इस्लामिक जिहाद में विस्तार से बताते हैं: “मध्ययुगीन भारत के महानतम सूफी संतों का दृष्टिकोण और मानसिकता… उन लोगों से अलग नहीं थी, जो काफिरों को धर्मांतरित करने के लिए कुरान, सुन्नत और शरिया के अनुसार बल के इस्तेमाल की वकालत करते थे। भारत के प्रसिद्ध सूफियों ने इस्लाम को विजयी बनाने के लिए हमेशा हिंसक जिहाद का समर्थन किया। भारत के सबसे प्रसिद्ध सूफी संत – निजामुद्दीन औलिया और मोइनुद्दीन चिश्ती – खुद काफिरों के खिलाफ पवित्र युद्ध में भाग लेने के लिए भारत आए, और उन्होंने युद्ध में भाग लिया भी ।”[6]
“ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, निजामुद्दीन औलिया के बाद भारत के शायद दूसरे सबसे महान सूफी संत थे, जिन्होंने हिंदू धर्म और उसकी प्रथाओं के प्रति गहरी नफरत दिखाई थी। अजमेर में आनासागर झील के पास पहुंचने पर, उन्होंने कई मूर्ति मंदिर देखे और अल्लाह और उनके पैगंबर की मदद से उन्हें जमीन पर गिराने का वादा किया। वहां बसने के बाद, ख्वाजा के अनुयायी हर दिन एक गाय, जो हिंदुओं के लिए पवित्र है, को एक प्रसिद्ध मंदिर के पास लाकर उसका वध करते थे, और उसके मांस से कबाब पकाते थे – स्पष्ट रूप से हिंदू धर्म के प्रति अपनी घृणा दिखाने के लिए। चिश्ती अपने शिष्यों के साथ काफिरों के खिलाफ जिहाद लड़ने के लिए भारत भी आए और सुल्तान मुहम्मद गौरी के विश्वासघाती युद्ध में भाग लिया जिसमें हिंदू राजा पृथ्वीराज चौहान 1192 ई. में हार गए थे। अपने जिहादी उत्साह में चिश्ती ने जीत का श्रेय खुद को देते हुए कहा, “हमने पिथौरा (पृथ्वीराज) को जिंदा पकड़ लिया है और उसे इस्लाम की सेना को सौंप दिया।” ये है सच्चाई उस ‘महान’ सूफी ‘संत’ की जिसे आज लाखों अज्ञानी हिंदू पूजते हैं!
कहते हैं कि फल पेड़ से अधिक दूर नहीं गिरता। मोइनुद्दीन चिश्ती के आज के वंशज फारूक चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती – और उनके दर्जनों मुस्लिम साथियों ने 12-20 साल की हिंदू लड़कियों को फंसाया, उनका बलात्कार किया और उन्हें ब्लैकमेल किया। इन तीनों के पास कांग्रेस पार्टी के नेता होने के नाते ताकत और धन था, जिसका वे भरपूर दिखावा करते थे।[7]
पीड़ितों में उच्च पदस्थ नौकरशाहों, पुलिस अधिकारियों और व्यापारियों की बेटियाँ शामिल थीं। वे अजमेर के स्कूलों और कॉलेजों की छात्राएँ थीं। उनमें से छह ने आत्महत्या कर ली; कई पीड़ित सार्वजनिक जांच से बचने के लिए अजमेर से बाहर चले गए, और बचे लोगों को आरोपियों द्वारा धमकाया गया जिसके कारण उनमें से अधिकांश ने गवाह बनने से इनकार कर दिया।
हालांकि पुलिस और प्रशासन को हिंदू लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना की जानकारी एक साल से भी ज़्यादा समय से थी, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते उन्होंने अपराधियों के खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की। इस घटना को मुख्यधारा के मीडिया ने भी कभी रिपोर्ट करने का कष्ट नहीं किया। इस घटना की सबसे पहले रिपोर्टिंग एक स्थानीय अख़बार के पत्रकार दीनबंधु चौधरी ने की थी। जब घटना की तस्वीरें सामने आईं और अजमेर में लोग सड़कों पर उतरे, तब जाकर पुलिस ने मामला दर्ज किया ।[8]
कुछ ही समय बाद चौधरी की रहस्यमय परिस्थितियों में हत्या कर दी गई।
बलात्कार घटना की जांच में केवल 30 पीड़ितों की पहचान हो पाई। इनमें से भी केवल एक दर्जन ने ही मामले दर्ज कराए, जिस से दस बाद में पीछे हट गए। केवल दो पीड़ित ही बाकी बचे जिन्होंने मामले को आगे बढ़ाया।
1998 में, अजमेर की एक सत्र अदालत ने आठ लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई, लेकिन दुर्भाग्यवश, बाद में राज्य उच्च न्यायालय ने उनमें से चार को बरी कर दिया। 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने चार अन्य, मोइजुल्लाह उर्फ पुत्तन, इशरत अली, अनवर चिश्ती और शमशुद्दीन की सजा घटाकर 10 साल कर दी, और निम्नलिखित बयान जारी किया: “हमारा मानना है कि अगर सजा घटाकर दस साल की कठोर कारावास कर दी जाए तो न्याय का उद्देश्य पूरा हो जाएगा ।”[9]
कैसी विडंबना है कि 1,100 हिंदू लड़कियों और उनके परिवारों की जिंदगी बर्बाद करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केवल दस साल की सजा देना ही उचित समझा! न्याय मिलने में देरी से एक पीड़िता इतनी परेशान हो गई कि उसने जज पर चिल्लाते हुए कहा: ” मैं अब दादी बन गई हूं; बस अब मुझे अकेला छोड़ दो ।”[10]
फरार सुहैल चिश्ती ने करने से पहले 26 साल तक छिपकर रहने के बाद आत्मसमर्पण किया। फरार सलीम चिश्ती को 2012 में गिरफ्तार किया गया था। एक अन्य मुख्य आरोपी, अलमास महाराज अभी भी फरार है और माना जाता है कि वह अमेरिका में है ।[11]
एक बड़ा सवाल
ये अनपढ़ और बदसूरत दिखने वाले जिहादी कैसे अच्छे मध्यवर्गीय परिवारों की युवा हिंदू लड़कियों को फंसाने में सक्षम हैं, वो भी ऐसे समाज में जहां अगर कोई सामान्य व्यक्ति किसी महिला को घूरता है तो उसे विकृत कहा जाता है। पुलिस को इन बलात्कारियों के काम करने के तरीके का अध्ययन करना चाहिए और सोशल मीडिया पर उनका पर्दाफाश करना चाहिए।
इस तरह लव जिहाद के बार-बार होने का सीधा सा कारण है कि अधिकतर मुस्लिम परिवारों में छह सात बच्चे होते हैं। अगर उनमें से दो जेल भी चले जाते हैं, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होती क्योंकि यह अल्लाह और इस्लाम के लिए होता है। उनके घर में अभी भी चार पाँच बच्चे हैं। साथ ही, उन्हें पता है कि उनके लड़के बलात्कार के लिए 10-12 साल और हत्या के लिए 15 साल में बाहर आ जाएंगे, क्योंकि भारत की कानूनी व्यवस्था के अनुसार, ” हर अपराधी को दूसरा मौका मिलना चाहिए ।”[12]
दूसरी ओर, हिंदू पीड़ितों के लिए, यह जीने मरने का प्रश्न है। इन लड़कियों को शायद कभी पति न मिले। इस तरह से मुसलमान हिंदुओं के खिलाफ़ दोहरा जनसांख्यिकीय प्रहार कर रहे हैं: अगर वे धर्म परिवर्तन में सफल हो जाते हैं, तो वह लड़की मुस्लिम बच्चे बनाने के कारखाने जैसी बन जाती है। और अगर वे उसका बलात्कार करने में सफल हो जाते हैं, लेकिन वह अंततः बच निकलती है, तो वह वैसे भी हिंदू बच्चों को जन्म नहीं दे पाएगी।
इस क्रिया को यदि आप कुछ पीढ़ियों तक गुणा करें तो लगभग 2080 तक हिंदुओं और मुसलमानों के बीच संख्यात्मक अंतर मुसलमानों के पक्ष में हो जाएगा।
हिन्दू लड़कियों की सुरक्षा कैसे करें?
युवा और संवेदनशील गैर-मुस्लिम लड़कियों की कमज़ोरी की पृष्ठभूमि में, अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए यहाँ कुछ उपाय दिए गए हैं। हो सकता है कुछ लोग इसे पागलपन कहें, पर हमें इससे डरना नहीं चाहिए क्योंकि अपने प्यारे मासूम बच्चे को खोने के बाद जीवन भर पछताने से पागल कहलवाना कहीं बेहतर है। यहाँ तक कि ईसाई चर्च भी हिंदू दृष्टिकोण से सहमत हो रहे हैं कि लव जिहाद एक ख़तरा है; और ईसाई समुदाय, विशेष रूप से स्कूली बच्चों को जिहादी जाल के बारे में जागरूक करने के लिए कदम उठा रहे हैं। इसमें पैरिशियन के लिए केरल फाइल्स फिल्म के विशेष शो आयोजित करना शामिल है ।[13]
तो ये रहे कुछ सुझाव:
- अपने बच्चे के ‘दोस्तों’ को जानें। यह मत सोचिए कि आपका बच्चा आपको हर किसी के बारे में बताता है। यदि वे आपको कुछ नहीं बताते तो इस का मतलब यह नहीं है कि कोई जिहादी आपके बच्चों, ख़ास तौर पर आपकी बेटियों को प्रभावित नहीं कर रहा है।
- धर्मनिरपेक्ष मूर्ख बनना बंद करना होगा। जिहादी दरिंदे धर्मनिरपेक्ष नहीं है। अगर आपकी बेटी के मुस्लिम पुरुष मित्र हैं, तो इससे उसके अगला शिकार बनने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
- अगर वे समान लिंग के मुस्लिम दोस्तों के साथ घुलते-मिलते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे पहले अपने धर्म की बुनियादी बातें समझें और इस्लाम के भीतर कट्टरपंथियों की गतिविधियों के बारे में जानें। उन्हें अच्छी तरह से सावधान करें।
- सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे धर्म परिवर्तन के तरीके से वाकिफ़ हों। इस तरह, अगर आपके बच्चे के मुस्लिम दोस्त उन्हें मस्जिद, दरगाह या मदरसे में किसी इस्लामिक मौलवी से मिलने के लिए फुसलाते हैं, तो आपके बच्चे को पता होना चाहिए कि उनके क्या इरादे हैं।
- अपने रडार को चालू रखें। धर्म परिवर्तन किसी धार्मिक स्थान पर ही हो, ऐसा ज़रूरी नहीं है। यह कॉफ़ी शॉप, क्लब, अपार्टमेंट लॉबी, फ़ेसबुक और डिस्कॉर्ड पर हो सकता है – ऐसी जगहें जहाँ आपको लगता है कि आपका बच्चा सुरक्षित है। कुछ लोग मुस्कुराते हुए घर भी आ सकते हैं और आपसे हाथ मिला सकते हैं। याद रहे कि मुहम्मद अली जिन्ना ने अपने पारसी दोस्त दिनशॉ पेटिट की 16 वर्षीय बेटी के साथ अवैध संबंध शुरू कर दिए। पेटिट ने जिन्ना के खिलाफ़ निरोधक आदेश प्राप्त किया, लेकिन वह उससे गुप्त रूप से संपर्क में रहा और जब वह 18 वर्ष की हुई, तो वह उसके साथ भाग गई और इस्लाम धर्म अपना लिया। ध्यान रहे कि उनमें से सबसे शिक्षित व्यक्ति भी संभावित शिकारी हैं ।[14]
- तो आपको कैसे पता चलेगा कि आपका बच्चा जिहाद का निशाना बन गया है? सतर्कता और निगरानी से! घर पर पर्याप्त बातचीत से। साथ ही, इंटरनेट कनेक्शन पर माता-पिता द्वारा फ़िल्टर करना भी महत्वपूर्ण है।[15]
- ध्यान देने योग्य संकेत: उनकी कंपनी की प्रकृति, गतिविधियां, पहनावे में बदलाव, उनका कम आधुनिक होना, सौंदर्य प्रसाधनों और आभूषणों में अचानक रुचि की कमी, व्यवहार में बदलाव, अपने ही धर्म के लोगों के प्रति असहिष्णुता का बढ़ना।
- अन्य लक्षण: पाश्चात्य संगीत और सामान्य संगीत से दूर होना, मंदिर जाने या घर में किसी भी धार्मिक अवसर पर भाग लेने या शामिल होने में अनिच्छा।
- एक और संकेत: आपके परिवार की गतिविधियों का हिस्सा रही परंपराओं और रीति-रिवाजों पर अचानक सवाल उठने लगना।
- खतरे की घंटी: लंबे समय तक गायब रहना और अपने कमरे में बंद रहना। (यह मेरे दोस्त के 18 वर्षीय बेटे के साथ कैलिफोर्निया में हुआ। उसने 2020 में कोविड लॉकडाउन के दौरान एक महीने तक रोजा रखा, लेकिन उसके माता-पिता को इसकी भनक तक नहीं लगी। बाद में उसने डी-इस्लामीकरण और अन-ब्रेनवॉशिंग के गहन कार्यक्रम से गुज़रा और हिंदू धर्म अपना लिया। उसके माता-पिता को अपने बेटे को वापस पाने के लिए बहुत ज़्यादा पैसे खर्च करने पड़े।)
ये उपाय अत्यधिक लग सकते हैं, लेकिन सोचिए: अगर आपका बच्चे अतिवादी विचार अपना लेते हैं, आपके विश्वासों या आपके देश के प्रति तिरस्कार दिखाते हैं और कट्टरपंथी प्रभावों में शामिल हो जाते हैं, तो इस परिणाम क्या होगा। आज के माहौल में, निरंतर सतर्कता आवश्यक है।
निष्कर्ष
अजमेर और ब्यावर में लड़कियों के जाल में फंसने की वजह से राष्ट्रीय स्तर केवल इस कारण चर्चा हुई कि मामला बहुत बाद था। परंतु बहुत से मामले प्रकाश में नहीं आते क्योंकि इनमें शामिल लोगों की संख्या कम होती है या पीड़ित आरोप नहीं लगाते।
2024 में, उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने एक मुस्लिम व्यक्ति को एक हिंदू लड़की के साथ बार-बार बलात्कार करने के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और लव जिहाद को एक ऐसा कृत्य बताया जिसमें मुस्लिम पुरुष प्यार की आड़ में धोखे से शादी करके हिंदू महिलाओं को इस्लाम में धर्मांतरित करने के लिए “व्यवस्थित रूप से निशाना बनाते हैं”। अदालत ने लव जिहाद को कुछ “अराजकतावादी तत्वों” द्वारा भारत पर प्रभुत्व स्थापित करने के लिए एक जानबूझकर किया गया प्रयास बताया, जिसे उसने जनसांख्यिकीय युद्ध करार दिया ।[16] अपने 42 पन्नों के आदेश में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने विस्तार से बताया कि समाज के कमजोर वर्गों की महिलाओं और कम उम्र की लड़कियों का ब्रेनवॉश करके लव जिहाद के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध धर्मांतरण किया जा रहा है।
न्यायाधीश को बोलने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि राजनीतिक प्रतिष्ठान, मीडिया, इतिहासकार और बुद्धिजीवियों ने न केवल हमें निराश किया है, बल्कि अपने एजेंडे के अनुरूप व्यवस्थित रूप से हमारे अतीत को छुपाया है।
अब समय आ गया है कि ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बिना किसी बाधा के सार्वजनिक चर्चा की जाए। जैसा कि सोशल मीडिया अकाउंट हिंदू पर्सिक्यूटेड ने लिखा: “मुद्दा अतीत के घावों को खोलना या विभाजन पैदा करना नहीं है। लोगों को अपने इतिहास, अपने उत्पीड़न के बारे में जानना चाहिए और उन खतरों के बारे में जागरूक होना चाहिए जो अभी भी चारों ओर छिपे हुए हैं।”
उद्धरण
[1]एक भारतीय बलात्कार मामले में न्याय के लिए 32 साल का इंतज़ार (बीबीसी); https://www.bbc.com/news/articles/cr40dzlezp7o
[2]ISIS सैनिकों को महिलाओं का बलात्कार करने के लिए कहा गया ताकि उन्हें ‘मुस्लिम बनाया जा सके’ (CNN World); https://edition.cnn.com/2015/10/08/middleeast/isis-rape-theology-soldiers-rape-women-to-make-them-muslim/index.html
[3]‘न्यू यॉर्क टाइम्स’: इस्लामिक स्टेट ने यज़ीदी महिलाओं के बलात्कार को सही ठहराने के लिए कुरान का इस्तेमाल किया (एनपीआर); https://www.npr.org/2015/08/13/432122595/new-york-times-islamic-state-uses-quran-to-justify-rape-of-yazidi-women
[4]ब्यावर से अजमेर तक: भारत में ग्रूमिंग गैंग का खौफनाक पैटर्न- संगठित इस्लामी नेटवर्क द्वारा हिंदू लड़कियों को निशाना बनाना, उनका यौन शोषण करना और जबरन धर्म परिवर्तन कराना (ऑपइंडिया); https://www.opindia.com/2025/02/from-beawar-to-ajmer-the-chilling-pattern-of-grooming-gangs-in-india-targeting-sexual-exploitation-forced-conversions-of-hindu-girls-by-islamist-networks/
[5]ब्यावर हॉरर: इस्लामिस्ट गिरोह द्वारा नाबालिग लड़कियों को जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया; पूर्व पार्षद हकीम कुरैशी समेत 8 हिरासत में (ऑर्गनाइजर); https://organiser.org/2025/02/26/280092/bharat/beawar-horror-islamist-gang-traps-minor-girls-forces-conversion-ex-councillor-hakim-qureshi-arrested/
[6]इस्लाम के प्रचार में सूफी (ऑनलाइन अभिलेखागार); https://archive.org/details/islamic-jihad-a-legacy-of-forced-conversion-imperialism-and-slavery-m.-a.-khan_202008/page/n181/mode/2up?view=theater&q=pithaura
[7]क्या है सनसनीखेज अजमेर सेक्स केस जिसमें 32 साल बाद 6 को मिली उम्रकैद की सजा (MSN); https://www.msn.com/en-in/news/India/what-is-the-sensational-ajmer-sex-case-in-which-6-got-life-terms-after-32-years/ar-AA1p7QgU
[8]अजमेर सेक्स स्कैंडल: 32 साल की लंबी अदालती लड़ाई के बाद छह को आजीवन कारावास (न्यूज इंटरवेंशन); https://www.newsintervention.com/ajmer-sex-scandal-life-sentences-for-six-after-lengthy-32-year-court-battle/#google_vignette
[9]राजस्थान के इतिहास में पहली बार एनएसए कब लगाया गया, अजमेर में हुए यौन अपराध के लिए (क्रिएटली); https://kreately.in/when-nsa-was-invoked-in-rajasthan-history-for-the-first-time-for-a-sex-crime-in-ajmer/
[10]क्या है सनसनीखेज अजमेर सेक्स केस जिसमें 32 साल बाद 6 को मिली उम्रकैद की सजा (MSN); https://www.msn.com/en-in/news/India/what-is-the-sensational-ajmer-sex-case-in-which-6-got-life-terms-after-32-years/ar-AA1p7QgU
[11]32 साल का लंबा इंतजार खत्म, अजमेर गैंगरेप मामले में 6 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा (न्यूज 18); https://www.news18.com/india/32-year-long-wait-ends-6-accused-in-ajmer-gang-rap-case-sentenced-to-life-imprisonment-9021533.html
[12]“हर पापी का एक भविष्य होता है”: सुप्रीम कोर्ट ने 4 साल की बच्ची के बलात्कार और हत्या के लिए व्यक्ति की मौत की सज़ा को कम किया (लाइव लॉ); https://www.livelaw.in/top-stories/supreme-court-death-sentence-commutes-rape-murder-mohd-firoz-vs-state-of-madhya-pradesh-2022-livelaw-sc-390-197087
[13]केरल चर्च ने लव जिहाद से लड़ने के लिए केरल स्टोरी का प्रदर्शन किया (टाइम्स ऑफ इंडिया); https://timesofindia.indiatimes.com/city/kochi/church-screens-kerala-story-to-fight-love-jihad/articleshow/109143874.cms
[14]विश्वासघात और प्रतिक्रिया: कैसे मुहम्मद अली जिन्ना की रतनबाई से शादी ने पारसी समुदाय को हिलाकर रख दिया (न्यूज़ 18); https://www.news18.com/india/betrayal-and-backlash-how-muhammad-ali-jinnahs-marriage-to-rattanbai-shook-the-parsi-community-9085793.html
[15]2025 के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिभावकीय नियंत्रण सॉफ्टवेयर (पीसी मैग); https://au.pcmag.com/parental-control-monitoring/44998/the-best-parental-control-software
[16]‘हिंदू लड़कियों को व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाने के लिए बड़े पैमाने पर लव जिहाद चलाया जा रहा है’: बरेली कोर्ट ने मुस्लिम व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई (स्वराज्य); https://swarajyamag.com/news-brief/love-jihad-being-carried-out-on-large-scale-to-systematically-target-hindu-girls-bareilly-court-sentences-muslim-man-to-life
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